24 नवंबर 2012 को पटना का पंचांग

शनिवार, 24 नवंबर 2012, पटना, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 24 नवंबर 2012 को पटना में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल एकादशी (10:38 तक), नक्षत्र रेवती (05:53, 25 नव॰ तक) और योग सिद्धि है। सूर्योदय 06:13 पर और सूर्यास्त 16:58 पर है। राहुकाल 08:54 से 10:15 तक है।

दिन और रात
दिन 06:13 – 16:58
रात 06:14 तक
तिथि
एकादशी, 10:38 तक
द्वादशी
नक्षत्र
रेवती, 05:53 तक
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

24 नवंबर 2012 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
शुक्ल एकादशी 10:38 तक
शुक्ल द्वादशी 12:38, 25 नव॰ तक
नक्षत्र
रेवती 05:53, 25 नव॰ तक
अश्विनी 08:37, 26 नव॰ तक
योग
सिद्धि 19:19 तक
व्यतीपातअशुभ 19:51, 25 नव॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 10:38 तक
बव 23:35 तक
बालव 12:38, 25 नव॰ तक
चंद्र राशि
मीन 05:53, 25 नव॰ तक
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:13
सूर्यास्त
16:58
चंद्रोदय
14:10
चंद्रास्त
02:21
दिनमान
10h 45m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2069
शक संवत
1934, नंदन संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:27 – 05:20
अभिजीत मुहूर्त
11:14 – 11:57

अशुभ समय

राहुकाल
08:54 – 10:15
यमगंड
12:56 – 14:17
गुलिक काल
06:13 – 07:34

24 नवंबर 2012 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल06:13 – 07:34टालें
शुभ07:34 – 08:54शुभ
रोग08:54 – 10:15टालें
उद्वेग10:15 – 11:36टालें
चर11:36 – 12:56सामान्य
लाभ12:56 – 14:17शुभ
अमृत14:17 – 15:37शुभ
काल15:37 – 16:58टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ16:58 – 18:38शुभ
उद्वेग18:38 – 20:17टालें
शुभ20:17 – 21:57शुभ
अमृत21:57 – 23:36शुभ
चर23:36 – 01:15सामान्य
रोग01:15 – 02:55टालें
काल02:55 – 04:34टालें
लाभ04:34 – 06:14शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि06:1307:07दिन
गुरु07:0708:01दिन
मंगल08:0108:54दिन
सूर्य08:5409:48दिन
शुक्र09:4810:42दिन
बुध10:4211:36दिन
चंद्र11:3612:29दिन
शनि12:2913:23दिन
गुरु13:2314:17दिन
मंगल14:1715:11दिन
सूर्य15:1116:04दिन
शुक्र16:0416:58दिन
बुध16:5818:04रात
चंद्र18:0419:11रात
शनि19:1120:17रात
गुरु20:1721:23रात
मंगल21:2322:30रात
सूर्य22:3023:36रात
शुक्र23:3600:42रात
बुध00:4201:49रात
चंद्र01:4902:55रात
शनि02:5504:01रात
गुरु04:0105:08रात
मंगल05:0806:14रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
24 नव॰ 2012शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
26 नव॰ 2012प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
28 नव॰ 2012कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
2 दिस॰ 2012संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
7 दिस॰ 2012कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
9 दिस॰ 2012कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
11 दिस॰ 2012प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
13 दिस॰ 2012मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
15 दिस॰ 2012धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश
16 दिस॰ 2012विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
23 दिस॰ 2012शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी

तिथियां पटना में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.0372° (लाहिड़ी)। समय पटना (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।