30 नवंबर 2012 को पटना का पंचांग

शुक्रवार, 30 नवंबर 2012, पटना, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 30 नवंबर 2012 को पटना में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण द्वितीया (01:32, 1 दिस॰ तक), नक्षत्र मृगशिरा (20:50 तक) और योग साध्य है। सूर्योदय 06:17 पर और सूर्यास्त 16:58 पर है। राहुकाल 10:18 से 11:38 तक है।

दिन और रात
दिन 06:17 – 16:58
रात 06:18 तक
तिथि
द्वितीया, 01:32 तक
तृतीया
नक्षत्र
मृगशिरा, 20:50 तक
आर्द्रा
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

30 नवंबर 2012 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
कृष्ण द्वितीया 01:32, 1 दिस॰ तक
कृष्ण तृतीया 03:54, 2 दिस॰ तक
नक्षत्र
आर्द्रा 23:41, 1 दिस॰ तक
योग
साध्य 00:20, 1 दिस॰ तक
शुभ 01:04, 2 दिस॰ तक
करण
तैतिल 12:15 तक
गर 01:32, 1 दिस॰ तक
वणिज 14:45, 1 दिस॰ तक
चंद्र राशि
वृषभ 07:20 तक
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:17
सूर्यास्त
16:58
चंद्रोदय
18:27
चंद्रास्त
07:28
दिनमान
10h 40m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2069
शक संवत
1934, नंदन संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:31 – 05:24
अभिजीत मुहूर्त
11:16 – 11:59

अशुभ समय

राहुकाल
10:18 – 11:38
यमगंड
14:18 – 15:38
गुलिक काल
07:37 – 08:58

30 नवंबर 2012 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर06:17 – 07:37सामान्य
लाभ07:37 – 08:58शुभ
अमृत08:58 – 10:18शुभ
काल10:18 – 11:38टालें
शुभ11:38 – 12:58शुभ
रोग12:58 – 14:18टालें
उद्वेग14:18 – 15:38टालें
चर15:38 – 16:58सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग16:58 – 18:38टालें
काल18:38 – 20:18टालें
लाभ20:18 – 21:58शुभ
उद्वेग21:58 – 23:38टालें
शुभ23:38 – 01:18शुभ
अमृत01:18 – 02:58शुभ
चर02:58 – 04:38सामान्य
रोग04:38 – 06:18टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र06:1707:11दिन
बुध07:1108:04दिन
चंद्र08:0408:58दिन
शनि08:5809:51दिन
गुरु09:5110:44दिन
मंगल10:4411:38दिन
सूर्य11:3812:31दिन
शुक्र12:3113:24दिन
बुध13:2414:18दिन
चंद्र14:1815:11दिन
शनि15:1116:04दिन
गुरु16:0416:58दिन
मंगल16:5818:04रात
सूर्य18:0419:11रात
शुक्र19:1120:18रात
बुध20:1821:25रात
चंद्र21:2522:31रात
शनि22:3123:38रात
गुरु23:3800:45रात
मंगल00:4501:51रात
सूर्य01:5102:58रात
शुक्र02:5804:05रात
बुध04:0505:11रात
चंद्र05:1106:18रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
2 दिस॰ 2012संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
7 दिस॰ 2012कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
9 दिस॰ 2012कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
11 दिस॰ 2012प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
13 दिस॰ 2012मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
15 दिस॰ 2012धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश
16 दिस॰ 2012विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
23 दिस॰ 2012शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
26 दिस॰ 2012प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
28 दिस॰ 2012मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां पटना में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.0374° (लाहिड़ी)। समय पटना (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।