23 नवंबर 2015 को पटना का पंचांग

सोमवार, 23 नवंबर 2015, पटना, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 23 नवंबर 2015 को पटना में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल द्वादशी (13:17 तक), नक्षत्र रेवती (12:17 तक) और योग सिद्धि है। सूर्योदय 06:12 पर और सूर्यास्त 16:58 पर है। राहुकाल 07:33 से 08:53 तक है।

दिन और रात
दिन 06:12 – 16:58
रात 06:13 तक
तिथि
द्वादशी, 13:17 तक
त्रयोदशी
नक्षत्र
रेवती, 12:17 तक
अश्विनी
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

23 नवंबर 2015 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
शुक्ल द्वादशी 13:17 तक
शुक्ल त्रयोदशी 10:13, 24 नव॰ तक
नक्षत्र
रेवती 12:17 तक
अश्विनी 09:58, 24 नव॰ तक
योग
सिद्धि 07:21 तक
व्यतीपातअशुभ 03:40, 24 नव॰ तक
वरीयान 23:55, 24 नव॰ तक
करण
बालव 13:17 तक
कौलव 23:46 तक
तैतिल 10:13, 24 नव॰ तक
चंद्र राशि
मीन 12:17 तक
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:12
सूर्यास्त
16:58
चंद्रोदय
15:05
चंद्रास्त
03:03
दिनमान
10h 47m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2072
शक संवत
1937, मन्मथ संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:26 – 05:19
अभिजीत मुहूर्त
11:14 – 11:57

अशुभ समय

राहुकाल
07:33 – 08:53
यमगंड
10:14 – 11:35
गुलिक काल
12:56 – 14:17

23 नवंबर 2015 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत06:12 – 07:33शुभ
काल07:33 – 08:53टालें
शुभ08:53 – 10:14शुभ
रोग10:14 – 11:35टालें
उद्वेग11:35 – 12:56टालें
चर12:56 – 14:17सामान्य
लाभ14:17 – 15:38शुभ
अमृत15:38 – 16:58शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर16:58 – 18:38सामान्य
रोग18:38 – 20:17टालें
काल20:17 – 21:56टालें
लाभ21:56 – 23:35शुभ
उद्वेग23:35 – 01:15टालें
शुभ01:15 – 02:54शुभ
अमृत02:54 – 04:33शुभ
चर04:33 – 06:13सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र06:1207:06दिन
शनि07:0608:00दिन
गुरु08:0008:53दिन
मंगल08:5309:47दिन
सूर्य09:4710:41दिन
शुक्र10:4111:35दिन
बुध11:3512:29दिन
चंद्र12:2913:23दिन
शनि13:2314:17दिन
गुरु14:1715:11दिन
मंगल15:1116:05दिन
सूर्य16:0516:58दिन
शुक्र16:5818:05रात
बुध18:0519:11रात
चंद्र19:1120:17रात
शनि20:1721:23रात
गुरु21:2322:29रात
मंगल22:2923:35रात
सूर्य23:3500:42रात
शुक्र00:4201:48रात
बुध01:4802:54रात
चंद्र02:5404:00रात
शनि04:0005:06रात
गुरु05:0606:13रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
24 नव॰ 2015प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
25 नव॰ 2015कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
29 नव॰ 2015संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
3 दिस॰ 2015कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
7 दिस॰ 2015कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
9 दिस॰ 2015प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
11 दिस॰ 2015मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
15 दिस॰ 2015विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
16 दिस॰ 2015धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश
21 दिस॰ 2015शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी

तिथियां पटना में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.0791° (लाहिड़ी)। समय पटना (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।