15 नवंबर 2016 को पटना का पंचांग

मंगलवार, 15 नवंबर 2016, पटना, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 15 नवंबर 2016 को पटना में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण प्रतिपदा (15:26 तक), नक्षत्र कृत्तिका (13:17 तक) और योग परिघ है। सूर्योदय 06:07 पर और सूर्यास्त 17:00 पर है। राहुकाल 14:17 से 15:39 तक है।

दिन और रात
दिन 06:07 – 17:00
रात 06:07 तक
तिथि
प्रतिपदा, 15:26 तक
द्वितीया
नक्षत्र
कृत्तिका, 13:17 तक
रोहिणी
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

15 नवंबर 2016 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
कृष्ण प्रतिपदा 15:26 तक
कृष्ण द्वितीया 11:42, 16 नव॰ तक
नक्षत्र
रोहिणी 10:17, 16 नव॰ तक
योग
परिघअशुभ 19:14 तक
शिव 15:00, 16 नव॰ तक
करण
कौलव 15:26 तक
तैतिल 01:32, 16 नव॰ तक
गर 11:42, 16 नव॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:07
सूर्यास्त
17:00
चंद्रोदय
18:02
चंद्रास्त
06:35
दिनमान
10h 54m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2073
शक संवत
1938, दुर्मुख संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:22 – 05:14
अभिजीत मुहूर्त
11:12 – 11:55

अशुभ समय

राहुकाल
14:17 – 15:39
यमगंड
08:50 – 10:12
गुलिक काल
11:33 – 12:55

15 नवंबर 2016 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग06:07 – 07:28टालें
उद्वेग07:28 – 08:50टालें
चर08:50 – 10:12सामान्य
लाभ10:12 – 11:33शुभ
अमृत11:33 – 12:55शुभ
काल12:55 – 14:17टालें
शुभ14:17 – 15:39शुभ
रोग15:39 – 17:00टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल17:00 – 18:39टालें
लाभ18:39 – 20:17शुभ
उद्वेग20:17 – 21:55टालें
शुभ21:55 – 23:34शुभ
अमृत23:34 – 01:12शुभ
चर01:12 – 02:51सामान्य
रोग02:51 – 04:29टालें
काल04:29 – 06:07टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल06:0707:01दिन
सूर्य07:0107:56दिन
शुक्र07:5608:50दिन
बुध08:5009:44दिन
चंद्र09:4410:39दिन
शनि10:3911:33दिन
गुरु11:3312:28दिन
मंगल12:2813:22दिन
सूर्य13:2214:17दिन
शुक्र14:1715:11दिन
बुध15:1116:06दिन
चंद्र16:0617:00दिन
शनि17:0018:06रात
गुरु18:0619:11रात
मंगल19:1120:17रात
सूर्य20:1721:23रात
शुक्र21:2322:28रात
बुध22:2823:34रात
चंद्र23:3400:39रात
शनि00:3901:45रात
गुरु01:4502:51रात
मंगल02:5103:56रात
सूर्य03:5605:02रात
शुक्र05:0206:07रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
16 नव॰ 2016वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
17 नव॰ 2016संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
21 नव॰ 2016कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
24 नव॰ 2016कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
27 नव॰ 2016प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
29 नव॰ 2016मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
3 दिस॰ 2016विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
10 दिस॰ 2016शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
12 दिस॰ 2016प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
13 दिस॰ 2016मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां पटना में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.0927° (लाहिड़ी)। समय पटना (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।