9 अक्टूबर 2017 को पटना का पंचांग

सोमवार, 9 अक्टूबर 2017, पटना, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 9 अक्टूबर 2017 को पटना में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण चतुर्थी (14:16 तक), नक्षत्र कृत्तिका (14:01 तक) और योग सिद्धि है। सूर्योदय 05:45 पर और सूर्यास्त 17:27 पर है। राहुकाल 07:12 से 08:40 तक है।

दिन और रात
दिन 05:45 – 17:27
रात 05:45 तक
तिथि
चतुर्थी, 14:16 तक
पंचमी
नक्षत्र
कृत्तिका, 14:01 तक
रोहिणी
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

9 अक्टूबर 2017 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
कृष्ण चतुर्थी 14:16 तक
कृष्ण पंचमी 11:38, 10 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
रोहिणी 12:08, 10 अक्टू॰ तक
योग
सिद्धि 15:52 तक
व्यतीपातअशुभ 12:35, 10 अक्टू॰ तक
करण
बालव 14:16 तक
कौलव 00:56, 10 अक्टू॰ तक
तैतिल 11:38, 10 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:45
सूर्यास्त
17:27
चंद्रोदय
20:31
चंद्रास्त
09:07
दिनमान
11h 43m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2074
शक संवत
1939, हेमलंब संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:06 – 04:56
अभिजीत मुहूर्त
11:13 – 11:59

अशुभ समय

राहुकाल
07:12 – 08:40
यमगंड
10:08 – 11:36
गुलिक काल
13:04 – 14:32

9 अक्टूबर 2017 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत05:45 – 07:12शुभ
काल07:12 – 08:40टालें
शुभ08:40 – 10:08शुभ
रोग10:08 – 11:36टालें
उद्वेग11:36 – 13:04टालें
चर13:04 – 14:32सामान्य
लाभ14:32 – 16:00शुभ
अमृत16:00 – 17:27शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर17:27 – 19:00सामान्य
रोग19:00 – 20:32टालें
काल20:32 – 22:04टालें
लाभ22:04 – 23:36शुभ
उद्वेग23:36 – 01:08टालें
शुभ01:08 – 02:41शुभ
अमृत02:41 – 04:13शुभ
चर04:13 – 05:45सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र05:4506:43दिन
शनि06:4307:42दिन
गुरु07:4208:40दिन
मंगल08:4009:39दिन
सूर्य09:3910:37दिन
शुक्र10:3711:36दिन
बुध11:3612:35दिन
चंद्र12:3513:33दिन
शनि13:3314:32दिन
गुरु14:3215:30दिन
मंगल15:3016:29दिन
सूर्य16:2917:27दिन
शुक्र17:2718:29रात
बुध18:2919:30रात
चंद्र19:3020:32रात
शनि20:3221:33रात
गुरु21:3322:35रात
मंगल22:3523:36रात
सूर्य23:3600:38रात
शुक्र00:3801:39रात
बुध01:3902:41रात
चंद्र02:4103:42रात
शनि03:4204:44रात
गुरु04:4405:45रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
9 अक्टू॰ 2017संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
12 अक्टू॰ 2017कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
15 अक्टू॰ 2017कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
17 अक्टू॰ 2017प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
17 अक्टू॰ 2017तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
19 अक्टू॰ 2017कार्तिक अमावस्याअमावस्या
23 अक्टू॰ 2017विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
31 अक्टू॰ 2017शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
2 नव॰ 2017प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
4 नव॰ 2017कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
7 नव॰ 2017संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां पटना में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.1053° (लाहिड़ी)। समय पटना (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।