12 अक्टूबर 2017 को पटना का पंचांग

गुरुवार, 12 अक्टूबर 2017, पटना, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 12 अक्टूबर 2017 को पटना में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण सप्तमी (06:56 तक), नक्षत्र आर्द्रा (08:57 तक) और योग परिघ है। सूर्योदय 05:46 पर और सूर्यास्त 17:25 पर है। राहुकाल 13:03 से 14:30 तक है।

दिन और रात
दिन 05:46 – 17:25
रात 05:47 तक
तिथि
अष्टमी, 04:59 तक
नवमी
नक्षत्र
आर्द्रा, 08:57 तक
पुनर्वसु
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

12 अक्टूबर 2017 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
कृष्ण सप्तमी 06:56 तक
कृष्ण अष्टमी 04:59, 13 अक्टू॰ तक
कृष्ण नवमी 03:21, 14 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
पुनर्वसु 07:45, 13 अक्टू॰ तक
योग
परिघअशुभ 06:28 तक
शिव 03:44, 13 अक्टू॰ तक
सिद्ध 01:16, 14 अक्टू॰ तक
करण
बव 06:56 तक
बालव 17:55 तक
कौलव 04:59, 13 अक्टू॰ तक
तैतिल 16:08, 13 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
मिथुन 02:02, 13 अक्टू॰ तक
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:46
सूर्यास्त
17:25
चंद्रोदय
23:21
चंद्रास्त
12:11
दिनमान
11h 38m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2074
शक संवत
1939, हेमलंब संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:07 – 04:57
अभिजीत मुहूर्त
11:12 – 11:59

अशुभ समय

राहुकाल
13:03 – 14:30
यमगंड
05:46 – 07:13
गुलिक काल
08:41 – 10:08

12 अक्टूबर 2017 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ05:46 – 07:13शुभ
रोग07:13 – 08:41टालें
उद्वेग08:41 – 10:08टालें
चर10:08 – 11:35सामान्य
लाभ11:35 – 13:03शुभ
अमृत13:03 – 14:30शुभ
काल14:30 – 15:57टालें
शुभ15:57 – 17:25शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत17:25 – 18:57शुभ
चर18:57 – 20:30सामान्य
रोग20:30 – 22:03टालें
काल22:03 – 23:36टालें
लाभ23:36 – 01:08शुभ
उद्वेग01:08 – 02:41टालें
शुभ02:41 – 04:14शुभ
अमृत04:14 – 05:47शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु05:4606:44दिन
मंगल06:4407:42दिन
सूर्य07:4208:41दिन
शुक्र08:4109:39दिन
बुध09:3910:37दिन
चंद्र10:3711:35दिन
शनि11:3512:33दिन
गुरु12:3313:32दिन
मंगल13:3214:30दिन
सूर्य14:3015:28दिन
शुक्र15:2816:26दिन
बुध16:2617:25दिन
चंद्र17:2518:26रात
शनि18:2619:28रात
गुरु19:2820:30रात
मंगल20:3021:32रात
सूर्य21:3222:34रात
शुक्र22:3423:36रात
बुध23:3600:37रात
चंद्र00:3701:39रात
शनि01:3902:41रात
गुरु02:4103:43रात
मंगल03:4304:45रात
सूर्य04:4505:47रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
12 अक्टू॰ 2017कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
15 अक्टू॰ 2017कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
17 अक्टू॰ 2017प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
17 अक्टू॰ 2017तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
19 अक्टू॰ 2017कार्तिक अमावस्याअमावस्या
23 अक्टू॰ 2017विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
31 अक्टू॰ 2017शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
2 नव॰ 2017प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
4 नव॰ 2017कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
7 नव॰ 2017संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां पटना में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.1054° (लाहिड़ी)। समय पटना (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।