11 अक्टूबर 2017 को पटना का पंचांग

बुधवार, 11 अक्टूबर 2017, पटना, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 11 अक्टूबर 2017 को पटना में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण षष्ठी (09:09 तक), नक्षत्र मृगशिरा (10:25 तक) और योग वरीयान है। सूर्योदय 05:46 पर और सूर्यास्त 17:25 पर है। राहुकाल 11:36 से 13:03 तक है।

दिन और रात
दिन 05:46 – 17:25
रात 05:46 तक
तिथि
षष्ठी, 09:09 तक
सप्तमी
नक्षत्र
मृगशिरा, 10:25 तक
आर्द्रा
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

11 अक्टूबर 2017 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण षष्ठी 09:09 तक
कृष्ण सप्तमी 06:56, 12 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
आर्द्रा 08:57, 12 अक्टू॰ तक
योग
वरीयान 09:26 तक
परिघअशुभ 06:28, 12 अक्टू॰ तक
करण
वणिज 09:09 तक
विष्टि (भद्रा) 20:00 तक
बव 06:56, 12 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:46
सूर्यास्त
17:25
चंद्रोदय
22:22
चंद्रास्त
11:12
दिनमान
11h 40m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2074
शक संवत
1939, हेमलंब संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:07 – 04:56
अभिजीत मुहूर्त
11:12 – 11:59 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
11:36 – 13:03
यमगंड
07:13 – 08:41
गुलिक काल
10:08 – 11:36

11 अक्टूबर 2017 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:46 – 07:13शुभ
अमृत07:13 – 08:41शुभ
काल08:41 – 10:08टालें
शुभ10:08 – 11:36शुभ
रोग11:36 – 13:03टालें
उद्वेग13:03 – 14:30टालें
चर14:30 – 15:58सामान्य
लाभ15:58 – 17:25शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग17:25 – 18:58टालें
शुभ18:58 – 20:31शुभ
अमृत20:31 – 22:03शुभ
चर22:03 – 23:36सामान्य
रोग23:36 – 01:08टालें
काल01:08 – 02:41टालें
लाभ02:41 – 04:13शुभ
उद्वेग04:13 – 05:46टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:4606:44दिन
चंद्र06:4407:42दिन
शनि07:4208:41दिन
गुरु08:4109:39दिन
मंगल09:3910:37दिन
सूर्य10:3711:36दिन
शुक्र11:3612:34दिन
बुध12:3413:32दिन
चंद्र13:3214:30दिन
शनि14:3015:29दिन
गुरु15:2916:27दिन
मंगल16:2717:25दिन
सूर्य17:2518:27रात
शुक्र18:2719:29रात
बुध19:2920:31रात
चंद्र20:3121:32रात
शनि21:3222:34रात
गुरु22:3423:36रात
मंगल23:3600:37रात
सूर्य00:3701:39रात
शुक्र01:3902:41रात
बुध02:4103:43रात
चंद्र03:4304:44रात
शनि04:4405:46रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
12 अक्टू॰ 2017कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
15 अक्टू॰ 2017कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
17 अक्टू॰ 2017प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
17 अक्टू॰ 2017तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
19 अक्टू॰ 2017कार्तिक अमावस्याअमावस्या
23 अक्टू॰ 2017विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
31 अक्टू॰ 2017शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
2 नव॰ 2017प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
4 नव॰ 2017कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
7 नव॰ 2017संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां पटना में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.1054° (लाहिड़ी)। समय पटना (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।