25 नवंबर 2018 को पटना का पंचांग

रविवार, 25 नवंबर 2018, पटना, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 25 नवंबर 2018 को पटना में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण द्वितीया (06:37 तक), नक्षत्र मृगशिरा (13:25 तक) और योग साध्य है। सूर्योदय 06:13 पर और सूर्यास्त 16:58 पर है। राहुकाल 15:37 से 16:58 तक है।

दिन और रात
दिन 06:13 – 16:58
रात 06:14 तक
तिथि
तृतीया, 04:06 तक
चतुर्थी
नक्षत्र
मृगशिरा, 13:25 तक
आर्द्रा
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

25 नवंबर 2018 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
कृष्ण द्वितीया 06:37 तक
कृष्ण तृतीया 04:06, 26 नव॰ तक
कृष्ण चतुर्थी 01:35, 27 नव॰ तक
नक्षत्र
आर्द्रा 11:37, 26 नव॰ तक
योग
साध्य 01:33, 26 नव॰ तक
शुभ 22:17, 26 नव॰ तक
करण
गर 06:37 तक
वणिज 17:22 तक
विष्टि (भद्रा) 04:06, 26 नव॰ तक
बव 14:50, 26 नव॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:13
सूर्यास्त
16:58
चंद्रोदय
19:07
चंद्रास्त
08:04
दिनमान
10h 45m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2075
शक संवत
1940, विलंब संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:27 – 05:20
अभिजीत मुहूर्त
11:14 – 11:57

अशुभ समय

राहुकाल
15:37 – 16:58
यमगंड
11:36 – 12:56
गुलिक काल
14:17 – 15:37

25 नवंबर 2018 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग06:13 – 07:34टालें
चर07:34 – 08:55सामान्य
लाभ08:55 – 10:15शुभ
अमृत10:15 – 11:36शुभ
काल11:36 – 12:56टालें
शुभ12:56 – 14:17शुभ
रोग14:17 – 15:37टालें
उद्वेग15:37 – 16:58टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ16:58 – 18:38शुभ
अमृत18:38 – 20:17शुभ
चर20:17 – 21:57सामान्य
रोग21:57 – 23:36टालें
काल23:36 – 01:16टालें
लाभ01:16 – 02:55शुभ
उद्वेग02:55 – 04:35टालें
शुभ04:35 – 06:14शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य06:1307:07दिन
शुक्र07:0708:01दिन
बुध08:0108:55दिन
चंद्र08:5509:48दिन
शनि09:4810:42दिन
गुरु10:4211:36दिन
मंगल11:3612:29दिन
सूर्य12:2913:23दिन
शुक्र13:2314:17दिन
बुध14:1715:11दिन
चंद्र15:1116:04दिन
शनि16:0416:58दिन
गुरु16:5818:04रात
मंगल18:0419:11रात
सूर्य19:1120:17रात
शुक्र20:1721:23रात
बुध21:2322:30रात
चंद्र22:3023:36रात
शनि23:3600:42रात
गुरु00:4201:49रात
मंगल01:4902:55रात
सूर्य02:5504:01रात
शुक्र04:0105:08रात
बुध05:0806:14रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
26 नव॰ 2018संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
30 नव॰ 2018कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
3 दिस॰ 2018कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
5 दिस॰ 2018प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
7 दिस॰ 2018मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
11 दिस॰ 2018विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
16 दिस॰ 2018धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश
19 दिस॰ 2018शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
20 दिस॰ 2018प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
22 दिस॰ 2018मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां पटना में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.1210° (लाहिड़ी)। समय पटना (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।