25 मई 2025 को पटना का पंचांग

रविवार, 25 मई 2025, पटना, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 25 मई 2025 को पटना में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण त्रयोदशी (15:51 तक), नक्षत्र अश्विनी (11:12 तक) और योग सौभाग्य है। सूर्योदय 05:00 पर और सूर्यास्त 18:32 पर है। राहुकाल 16:51 से 18:32 तक है।

दिन और रात
दिन 05:00 – 18:32
रात 04:59 तक
तिथि
त्रयोदशी, 15:51 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
अश्विनी, 11:12 तक
भरणी
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

25 मई 2025 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
कृष्ण त्रयोदशी 15:51 तक
कृष्ण चतुर्दशी 12:12, 26 मई तक
नक्षत्र
भरणी 08:23, 26 मई तक
योग
सौभाग्य 11:06 तक
शोभन 07:01, 26 मई तक
करण
गर 05:38 तक
वणिज 15:51 तक
विष्टि (भद्रा) 02:02, 26 मई तक
शकुनि 12:12, 26 मई तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिवृषभ
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:00
सूर्यास्त
18:32
चंद्रोदय
03:06
चंद्रास्त
16:42
दिनमान
13h 33m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
वैशाख
मास (पूर्णिमांत)
ज्येष्ठ
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:36 – 04:18
अभिजीत मुहूर्त
11:19 – 12:13

अशुभ समय

राहुकाल
16:51 – 18:32
यमगंड
11:46 – 13:28
गुलिक काल
15:09 – 16:51

25 मई 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग05:00 – 06:41टालें
चर06:41 – 08:23सामान्य
लाभ08:23 – 10:04शुभ
अमृत10:04 – 11:46शुभ
काल11:46 – 13:28टालें
शुभ13:28 – 15:09शुभ
रोग15:09 – 16:51टालें
उद्वेग16:51 – 18:32टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ18:32 – 19:51शुभ
अमृत19:51 – 21:09शुभ
चर21:09 – 22:27सामान्य
रोग22:27 – 23:46टालें
काल23:46 – 01:04टालें
लाभ01:04 – 02:23शुभ
उद्वेग02:23 – 03:41टालें
शुभ03:41 – 04:59शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य05:0006:07दिन
शुक्र06:0707:15दिन
बुध07:1508:23दिन
चंद्र08:2309:31दिन
शनि09:3110:38दिन
गुरु10:3811:46दिन
मंगल11:4612:54दिन
सूर्य12:5414:01दिन
शुक्र14:0115:09दिन
बुध15:0916:17दिन
चंद्र16:1717:25दिन
शनि17:2518:32दिन
गुरु18:3219:25रात
मंगल19:2520:17रात
सूर्य20:1721:09रात
शुक्र21:0922:01रात
बुध22:0122:54रात
चंद्र22:5423:46रात
शनि23:4600:38रात
गुरु00:3801:30रात
मंगल01:3002:23रात
सूर्य02:2303:15रात
शुक्र03:1504:07रात
बुध04:0704:59रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
25 मई 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
27 मई 2025ज्येष्ठ अमावस्याअमावस्या
30 मई 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
6 जून 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
9 जून 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
11 जून 2025ज्येष्ठ पूर्णिमापूर्णिमा
15 जून 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
15 जून 2025मिथुन संक्रांतिसूर्य का मिथुन में प्रवेश
19 जून 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
21 जून 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
23 जून 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां पटना में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2118° (लाहिड़ी)। समय पटना (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।