28 मई 2025 को पटना का पंचांग

बुधवार, 28 मई 2025, पटना, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 28 मई 2025 को पटना में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल प्रतिपदा (05:03 तक), नक्षत्र मृगशिरा (00:29, 29 मई तक) और योग धृति है। सूर्योदय 04:59 पर और सूर्यास्त 18:34 पर है। राहुकाल 11:46 से 13:28 तक है।

दिन और रात
दिन 04:59 – 18:34
रात 04:59 तक
तिथि
द्वितीया, 01:54 तक
तृतीया
नक्षत्र
मृगशिरा, 00:29 तक
आर्द्रा
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

28 मई 2025 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
शुक्ल प्रतिपदा 05:03 तक
शुक्ल द्वितीया 01:54, 29 मई तक
शुक्ल तृतीया 23:18, 29 मई तक
नक्षत्र
मृगशिरा 00:29, 29 मई तक
आर्द्रा 22:38, 29 मई तक
योग
धृति 19:08 तक
शूलअशुभ 15:46, 29 मई तक
करण
बव 05:03 तक
बालव 15:25 तक
कौलव 01:54, 29 मई तक
तैतिल 12:32, 29 मई तक
चंद्र राशि
वृषभ 13:36 तक
सूर्य राशिवृषभ
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
04:59
सूर्यास्त
18:34
चंद्रोदय
05:39
चंद्रास्त
20:15
दिनमान
13h 35m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
ज्येष्ठ
मास (पूर्णिमांत)
ज्येष्ठ
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:35 – 04:17
अभिजीत मुहूर्त
11:19 – 12:14 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
11:46 – 13:28
यमगंड
06:41 – 08:23
गुलिक काल
10:04 – 11:46

28 मई 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ04:59 – 06:41शुभ
अमृत06:41 – 08:23शुभ
काल08:23 – 10:04टालें
शुभ10:04 – 11:46शुभ
रोग11:46 – 13:28टालें
उद्वेग13:28 – 15:10टालें
चर15:10 – 16:52सामान्य
लाभ16:52 – 18:34शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग18:34 – 19:52टालें
शुभ19:52 – 21:10शुभ
अमृत21:10 – 22:28शुभ
चर22:28 – 23:46सामान्य
रोग23:46 – 01:04टालें
काल01:04 – 02:22टालें
लाभ02:22 – 03:40शुभ
उद्वेग03:40 – 04:59टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध04:5906:07दिन
चंद्र06:0707:15दिन
शनि07:1508:23दिन
गुरु08:2309:30दिन
मंगल09:3010:38दिन
सूर्य10:3811:46दिन
शुक्र11:4612:54दिन
बुध12:5414:02दिन
चंद्र14:0215:10दिन
शनि15:1016:18दिन
गुरु16:1817:26दिन
मंगल17:2618:34दिन
सूर्य18:3419:26रात
शुक्र19:2620:18रात
बुध20:1821:10रात
चंद्र21:1022:02रात
शनि22:0222:54रात
गुरु22:5423:46रात
मंगल23:4600:38रात
सूर्य00:3801:30रात
शुक्र01:3002:22रात
बुध02:2203:14रात
चंद्र03:1404:06रात
शनि04:0604:59रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
30 मई 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
6 जून 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
9 जून 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
11 जून 2025ज्येष्ठ पूर्णिमापूर्णिमा
15 जून 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
15 जून 2025मिथुन संक्रांतिसूर्य का मिथुन में प्रवेश
19 जून 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
21 जून 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
23 जून 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
25 जून 2025आषाढ़ अमावस्याअमावस्या

तिथियां पटना में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2119° (लाहिड़ी)। समय पटना (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।