22 जून 2025 को पटना का पंचांग

रविवार, 22 जून 2025, पटना, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 22 जून 2025 को पटना में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण द्वादशी (01:22, 23 जून तक), नक्षत्र भरणी (17:38 तक) और योग सुकर्मा है। सूर्योदय 04:59 पर और सूर्यास्त 18:43 पर है। राहुकाल 17:00 से 18:43 तक है।

दिन और रात
दिन 04:59 – 18:43
रात 04:59 तक
तिथि
द्वादशी, 01:22 तक
त्रयोदशी
नक्षत्र
भरणी, 17:38 तक
कृत्तिका
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

22 जून 2025 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
कृष्ण द्वादशी 01:22, 23 जून तक
कृष्ण त्रयोदशी 22:10, 23 जून तक
नक्षत्र
भरणी 17:38 तक
कृत्तिका 15:16, 23 जून तक
योग
सुकर्मा 16:57 तक
धृति 13:17, 23 जून तक
करण
कौलव 14:56 तक
तैतिल 01:22, 23 जून तक
गर 11:46, 23 जून तक
चंद्र राशि
मेष 23:03 तक
सूर्य राशिमिथुन
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
04:59
सूर्यास्त
18:43
चंद्रोदय
01:41
चंद्रास्त
15:32
दिनमान
13h 44m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
ज्येष्ठ
मास (पूर्णिमांत)
आषाढ़
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:37 – 04:18
अभिजीत मुहूर्त
11:23 – 12:18

अशुभ समय

राहुकाल
17:00 – 18:43
यमगंड
11:51 – 13:34
गुलिक काल
15:17 – 17:00

22 जून 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग04:59 – 06:42टालें
चर06:42 – 08:25सामान्य
लाभ08:25 – 10:08शुभ
अमृत10:08 – 11:51शुभ
काल11:51 – 13:34टालें
शुभ13:34 – 15:17शुभ
रोग15:17 – 17:00टालें
उद्वेग17:00 – 18:43टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ18:43 – 20:00शुभ
अमृत20:00 – 21:17शुभ
चर21:17 – 22:34सामान्य
रोग22:34 – 23:51टालें
काल23:51 – 01:08टालें
लाभ01:08 – 02:25शुभ
उद्वेग02:25 – 03:42टालें
शुभ03:42 – 04:59शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य04:5906:08दिन
शुक्र06:0807:16दिन
बुध07:1608:25दिन
चंद्र08:2509:34दिन
शनि09:3410:42दिन
गुरु10:4211:51दिन
मंगल11:5113:00दिन
सूर्य13:0014:08दिन
शुक्र14:0815:17दिन
बुध15:1716:26दिन
चंद्र16:2617:34दिन
शनि17:3418:43दिन
गुरु18:4319:34रात
मंगल19:3420:26रात
सूर्य20:2621:17रात
शुक्र21:1722:08रात
बुध22:0823:00रात
चंद्र23:0023:51रात
शनि23:5100:42रात
गुरु00:4201:34रात
मंगल01:3402:25रात
सूर्य02:2503:16रात
शुक्र03:1604:08रात
बुध04:0804:59रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
23 जून 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
25 जून 2025आषाढ़ अमावस्याअमावस्या
29 जून 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
6 जुल॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
8 जुल॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
10 जुल॰ 2025आषाढ़ पूर्णिमापूर्णिमा
14 जुल॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
16 जुल॰ 2025कर्क संक्रांतिसूर्य का कर्क में प्रवेश
18 जुल॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
21 जुल॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी

तिथियां पटना में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2129° (लाहिड़ी)। समय पटना (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।