22 जुलाई 2025 को पटना का पंचांग

मंगलवार, 22 जुलाई 2025, पटना, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 22 जुलाई 2025 को पटना में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण द्वादशी (07:06 तक), नक्षत्र मृगशिरा (19:24 तक) और योग ध्रुव है। सूर्योदय 05:11 पर और सूर्यास्त 18:40 पर है। राहुकाल 15:18 से 16:59 तक है।

दिन और रात
दिन 05:11 – 18:40
रात 05:11 तक
तिथि
त्रयोदशी, 04:40 तक
नक्षत्र
मृगशिरा, 19:24 तक
आर्द्रा
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

22 जुलाई 2025 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
कृष्ण द्वादशी 07:06 तक
कृष्ण त्रयोदशी 04:40, 23 जुल॰ तक
कृष्ण चतुर्दशी 02:29, 24 जुल॰ तक
नक्षत्र
आर्द्रा 17:54, 23 जुल॰ तक
योग
ध्रुव 15:32 तक
व्याघातअशुभ 12:34, 23 जुल॰ तक
करण
तैतिल 07:06 तक
गर 17:51 तक
वणिज 04:40, 23 जुल॰ तक
विष्टि (भद्रा) 15:32, 23 जुल॰ तक
चंद्र राशि
वृषभ 08:15 तक
सूर्य राशिकर्क
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:11
सूर्यास्त
18:40
चंद्रोदय
02:08
चंद्रास्त
16:43
दिनमान
13h 29m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आषाढ़
मास (पूर्णिमांत)
श्रावण
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:47 – 04:29
अभिजीत मुहूर्त
11:28 – 12:22

अशुभ समय

राहुकाल
15:18 – 16:59
यमगंड
08:33 – 10:14
गुलिक काल
11:55 – 13:36

22 जुलाई 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग05:11 – 06:52टालें
उद्वेग06:52 – 08:33टालें
चर08:33 – 10:14सामान्य
लाभ10:14 – 11:55शुभ
अमृत11:55 – 13:36शुभ
काल13:36 – 15:18टालें
शुभ15:18 – 16:59शुभ
रोग16:59 – 18:40टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल18:40 – 19:59टालें
लाभ19:59 – 21:18शुभ
उद्वेग21:18 – 22:37टालें
शुभ22:37 – 23:56शुभ
अमृत23:56 – 01:14शुभ
चर01:14 – 02:33सामान्य
रोग02:33 – 03:52टालें
काल03:52 – 05:11टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल05:1106:18दिन
सूर्य06:1807:26दिन
शुक्र07:2608:33दिन
बुध08:3309:40दिन
चंद्र09:4010:48दिन
शनि10:4811:55दिन
गुरु11:5513:03दिन
मंगल13:0314:10दिन
सूर्य14:1015:18दिन
शुक्र15:1816:25दिन
बुध16:2517:32दिन
चंद्र17:3218:40दिन
शनि18:4019:33रात
गुरु19:3320:25रात
मंगल20:2521:18रात
सूर्य21:1822:10रात
शुक्र22:1023:03रात
बुध23:0323:56रात
चंद्र23:5600:48रात
शनि00:4801:41रात
गुरु01:4102:33रात
मंगल02:3303:26रात
सूर्य03:2604:19रात
शुक्र04:1905:11रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
22 जुल॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
24 जुल॰ 2025श्रावण अमावस्याअमावस्या
28 जुल॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
5 अग॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
7 अग॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
9 अग॰ 2025श्रावण पूर्णिमापूर्णिमा
13 अग॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
16 अग॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
17 अग॰ 2025सिंह संक्रांतिसूर्य का सिंह में प्रवेश
19 अग॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी

तिथियां पटना में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2140° (लाहिड़ी)। समय पटना (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।