13 जून 2026 को पटना का पंचांग

शनिवार, 13 जून 2026, पटना, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 13 जून 2026 को पटना में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण त्रयोदशी (16:08 तक), नक्षत्र कृत्तिका (01:17, 14 जून तक) और योग सुकर्मा है। सूर्योदय 04:57 पर और सूर्यास्त 18:41 पर है। राहुकाल 08:23 से 10:06 तक है।

दिन और रात
दिन 04:57 – 18:41
रात 04:58 तक
तिथि
त्रयोदशी, 16:08 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
कृत्तिका, 01:17 तक
रोहिणी
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

13 जून 2026 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
कृष्ण त्रयोदशी 16:08 तक
कृष्ण चतुर्दशी 12:20, 14 जून तक
नक्षत्र
कृत्तिका 01:17, 14 जून तक
रोहिणी 22:14, 14 जून तक
योग
सुकर्मा 17:28 तक
धृति 13:15, 14 जून तक
करण
गर 05:55 तक
वणिज 16:08 तक
विष्टि (भद्रा) 02:15, 14 जून तक
शकुनि 12:20, 14 जून तक
चंद्र राशि
मेष 09:25 तक
सूर्य राशिवृषभ
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
04:57
सूर्यास्त
18:41
चंद्रोदय
02:44
चंद्रास्त
16:54
दिनमान
13h 43m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
अधिक ज्येष्ठ
मास (पूर्णिमांत)
अधिक ज्येष्ठ
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:35 – 04:16
अभिजीत मुहूर्त
11:22 – 12:16

अशुभ समय

राहुकाल
08:23 – 10:06
यमगंड
13:32 – 15:15
गुलिक काल
04:57 – 06:40

13 जून 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल04:57 – 06:40टालें
शुभ06:40 – 08:23शुभ
रोग08:23 – 10:06टालें
उद्वेग10:06 – 11:49टालें
चर11:49 – 13:32सामान्य
लाभ13:32 – 15:15शुभ
अमृत15:15 – 16:58शुभ
काल16:58 – 18:41टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ18:41 – 19:58शुभ
उद्वेग19:58 – 21:15टालें
शुभ21:15 – 22:32शुभ
अमृत22:32 – 23:49शुभ
चर23:49 – 01:06सामान्य
रोग01:06 – 02:23टालें
काल02:23 – 03:40टालें
लाभ03:40 – 04:58शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि04:5706:06दिन
गुरु06:0607:15दिन
मंगल07:1508:23दिन
सूर्य08:2309:32दिन
शुक्र09:3210:40दिन
बुध10:4011:49दिन
चंद्र11:4912:58दिन
शनि12:5814:06दिन
गुरु14:0615:15दिन
मंगल15:1516:23दिन
सूर्य16:2317:32दिन
शुक्र17:3218:41दिन
बुध18:4119:32रात
चंद्र19:3220:23रात
शनि20:2321:15रात
गुरु21:1522:06रात
मंगल22:0622:58रात
सूर्य22:5823:49रात
शुक्र23:4900:40रात
बुध00:4001:32रात
चंद्र01:3202:23रात
शनि02:2303:15रात
गुरु03:1504:06रात
मंगल04:0604:58रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
13 जून 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
15 जून 2026अधिक ज्येष्ठ अमावस्याअमावस्या
15 जून 2026मिथुन संक्रांतिसूर्य का मिथुन में प्रवेश
18 जून 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
25 जून 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
27 जून 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
29 जून 2026ज्येष्ठ पूर्णिमापूर्णिमा
4 जुल॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
8 जुल॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
11 जुल॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
12 जुल॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां पटना में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2265° (लाहिड़ी)। समय पटना (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।