6 अगस्त 2026 को पटना का पंचांग

गुरुवार, 6 अगस्त 2026, पटना, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 6 अगस्त 2026 को पटना में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण अष्टमी (18:53 तक), नक्षत्र भरणी (20:13 तक) और योग गंड है। सूर्योदय 05:18 पर और सूर्यास्त 18:32 पर है। राहुकाल 13:34 से 15:13 तक है।

दिन और रात
दिन 05:18 – 18:32
रात 05:18 तक
तिथि
अष्टमी, 18:53 तक
नवमी
नक्षत्र
भरणी, 20:13 तक
कृत्तिका
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

6 अगस्त 2026 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
कृष्ण अष्टमी 18:53 तक
कृष्ण नवमी 16:37, 7 अग॰ तक
नक्षत्र
भरणी 20:13 तक
कृत्तिका 18:43, 7 अग॰ तक
योग
गंडअशुभ 15:01 तक
वृद्धि 12:11, 7 अग॰ तक
करण
बालव 07:51 तक
कौलव 18:53 तक
तैतिल 05:48, 7 अग॰ तक
चंद्र राशि
मेष 01:53, 7 अग॰ तक
सूर्य राशिकर्क
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:18
सूर्यास्त
18:32
चंद्रोदय
23:16
चंद्रास्त
12:22
दिनमान
13h 14m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आषाढ़
मास (पूर्णिमांत)
श्रावण
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:52 – 04:35
अभिजीत मुहूर्त
11:28 – 12:21

अशुभ समय

राहुकाल
13:34 – 15:13
यमगंड
05:18 – 06:57
गुलिक काल
08:36 – 10:16

6 अगस्त 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ05:18 – 06:57शुभ
रोग06:57 – 08:36टालें
उद्वेग08:36 – 10:16टालें
चर10:16 – 11:55सामान्य
लाभ11:55 – 13:34शुभ
अमृत13:34 – 15:13शुभ
काल15:13 – 16:52टालें
शुभ16:52 – 18:32शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत18:32 – 19:52शुभ
चर19:52 – 21:13सामान्य
रोग21:13 – 22:34टालें
काल22:34 – 23:55टालें
लाभ23:55 – 01:16शुभ
उद्वेग01:16 – 02:37टालें
शुभ02:37 – 03:58शुभ
अमृत03:58 – 05:18शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु05:1806:24दिन
मंगल06:2407:30दिन
सूर्य07:3008:36दिन
शुक्र08:3609:42दिन
बुध09:4210:49दिन
चंद्र10:4911:55दिन
शनि11:5513:01दिन
गुरु13:0114:07दिन
मंगल14:0715:13दिन
सूर्य15:1316:19दिन
शुक्र16:1917:25दिन
बुध17:2518:32दिन
चंद्र18:3219:25रात
शनि19:2520:19रात
गुरु20:1921:13रात
मंगल21:1322:07रात
सूर्य22:0723:01रात
शुक्र23:0123:55रात
बुध23:5500:49रात
चंद्र00:4901:43रात
शनि01:4302:37रात
गुरु02:3703:31रात
मंगल03:3104:24रात
सूर्य04:2405:18रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
6 अग॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
9 अग॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
10 अग॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
12 अग॰ 2026श्रावण अमावस्याअमावस्या
16 अग॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 अग॰ 2026सिंह संक्रांतिसूर्य का सिंह में प्रवेश
23 अग॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
26 अग॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
28 अग॰ 2026श्रावण पूर्णिमापूर्णिमा
1 सित॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
4 सित॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां पटना में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2286° (लाहिड़ी)। समय पटना (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।