5 मई 2027 को पटना का पंचांग

बुधवार, 5 मई 2027, पटना, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 5 मई 2027 को पटना में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण चतुर्दशी (18:17 तक), नक्षत्र अश्विनी (02:32, 6 मई तक) और योग प्रीति है। सूर्योदय 05:10 पर और सूर्यास्त 18:22 पर है। राहुकाल 11:46 से 13:25 तक है।

दिन और रात
दिन 05:10 – 18:22
रात 05:09 तक
तिथि
चतुर्दशी, 18:17 तक
अमावस्या
नक्षत्र
अश्विनी, 02:32 तक
भरणी
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

5 मई 2027 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण चतुर्दशी 18:17 तक
अमावस्या 16:28, 6 मई तक
नक्षत्र
अश्विनी 02:32, 6 मई तक
भरणी 01:18, 7 मई तक
योग
प्रीति 14:15 तक
आयुष्मान 11:47, 6 मई तक
करण
विष्टि (भद्रा) 06:59 तक
शकुनि 18:17 तक
चतुष्पद 05:26, 6 मई तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमेष
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:10
सूर्यास्त
18:22
चंद्रोदय
03:56
चंद्रास्त
17:23
दिनमान
13h 12m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
चैत्र
मास (पूर्णिमांत)
वैशाख
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:44 – 04:27
अभिजीत मुहूर्त
11:19 – 12:12 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
11:46 – 13:25
यमगंड
06:49 – 08:28
गुलिक काल
10:07 – 11:46

5 मई 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:10 – 06:49शुभ
अमृत06:49 – 08:28शुभ
काल08:28 – 10:07टालें
शुभ10:07 – 11:46शुभ
रोग11:46 – 13:25टालें
उद्वेग13:25 – 15:04टालें
चर15:04 – 16:43सामान्य
लाभ16:43 – 18:22शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग18:22 – 19:43टालें
शुभ19:43 – 21:04शुभ
अमृत21:04 – 22:25शुभ
चर22:25 – 23:46सामान्य
रोग23:46 – 01:06टालें
काल01:06 – 02:27टालें
लाभ02:27 – 03:48शुभ
उद्वेग03:48 – 05:09टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:1006:16दिन
चंद्र06:1607:22दिन
शनि07:2208:28दिन
गुरु08:2809:34दिन
मंगल09:3410:40दिन
सूर्य10:4011:46दिन
शुक्र11:4612:52दिन
बुध12:5213:58दिन
चंद्र13:5815:04दिन
शनि15:0416:10दिन
गुरु16:1017:16दिन
मंगल17:1618:22दिन
सूर्य18:2219:16रात
शुक्र19:1620:10रात
बुध20:1021:04रात
चंद्र21:0421:58रात
शनि21:5822:52रात
गुरु22:5223:46रात
मंगल23:4600:39रात
सूर्य00:3901:33रात
शुक्र01:3302:27रात
बुध02:2703:21रात
चंद्र03:2104:15रात
शनि04:1505:09रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
6 मई 2027वैशाख अमावस्याअमावस्या
10 मई 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
15 मई 2027वृषभ संक्रांतिसूर्य का वृषभ में प्रवेश
16 मई 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
18 मई 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
20 मई 2027वैशाख पूर्णिमापूर्णिमा
24 मई 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
29 मई 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
1 जून 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
3 जून 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां पटना में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2390° (लाहिड़ी)। समय पटना (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।