7 जून 2029 को पटना का पंचांग

गुरुवार, 7 जून 2029, पटना, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 7 जून 2029 को पटना में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण एकादशी (02:43, 8 जून तक), नक्षत्र रेवती (16:23 तक) और योग सौभाग्य है। सूर्योदय 04:57 पर और सूर्यास्त 18:38 पर है। राहुकाल 13:31 से 15:13 तक है।

दिन और रात
दिन 04:57 – 18:38
रात 04:57 तक
तिथि
एकादशी, 02:43 तक
द्वादशी
नक्षत्र
रेवती, 16:23 तक
अश्विनी
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

7 जून 2029 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
कृष्ण एकादशी 02:43, 8 जून तक
कृष्ण द्वादशी 04:55, 9 जून तक
नक्षत्र
रेवती 16:23 तक
अश्विनी 19:14, 8 जून तक
योग
सौभाग्य 17:33 तक
शोभन 18:24, 8 जून तक
करण
बव 13:33 तक
बालव 02:43, 8 जून तक
कौलव 15:51, 8 जून तक
चंद्र राशि
मीन 16:23 तक
सूर्य राशिवृषभ
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
04:57
सूर्यास्त
18:38
चंद्रोदय
01:19
चंद्रास्त
14:30
दिनमान
13h 41m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
वैशाख
मास (पूर्णिमांत)
ज्येष्ठ
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:35 – 04:16
अभिजीत मुहूर्त
11:21 – 12:15

अशुभ समय

राहुकाल
13:31 – 15:13
यमगंड
04:57 – 06:40
गुलिक काल
08:23 – 10:05

7 जून 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ04:57 – 06:40शुभ
रोग06:40 – 08:23टालें
उद्वेग08:23 – 10:05टालें
चर10:05 – 11:48सामान्य
लाभ11:48 – 13:31शुभ
अमृत13:31 – 15:13शुभ
काल15:13 – 16:56टालें
शुभ16:56 – 18:38शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत18:38 – 19:56शुभ
चर19:56 – 21:13सामान्य
रोग21:13 – 22:31टालें
काल22:31 – 23:48टालें
लाभ23:48 – 01:05शुभ
उद्वेग01:05 – 02:23टालें
शुभ02:23 – 03:40शुभ
अमृत03:40 – 04:57शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु04:5706:06दिन
मंगल06:0607:14दिन
सूर्य07:1408:23दिन
शुक्र08:2309:31दिन
बुध09:3110:39दिन
चंद्र10:3911:48दिन
शनि11:4812:56दिन
गुरु12:5614:05दिन
मंगल14:0515:13दिन
सूर्य15:1316:22दिन
शुक्र16:2217:30दिन
बुध17:3018:38दिन
चंद्र18:3819:30रात
शनि19:3020:22रात
गुरु20:2221:13रात
मंगल21:1322:05रात
सूर्य22:0522:56रात
शुक्र22:5623:48रात
बुध23:4800:39रात
चंद्र00:3901:31रात
शनि01:3102:23रात
गुरु02:2303:14रात
मंगल03:1404:06रात
सूर्य04:0604:57रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
7 जून 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
9 जून 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
12 जून 2029ज्येष्ठ अमावस्याअमावस्या
15 जून 2029मिथुन संक्रांतिसूर्य का मिथुन में प्रवेश
16 जून 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
22 जून 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
24 जून 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
26 जून 2029ज्येष्ठ पूर्णिमापूर्णिमा
30 जून 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
4 जुल॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां पटना में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2682° (लाहिड़ी)। समय पटना (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।