1 अगस्त 2029 को पटना का पंचांग

बुधवार, 1 अगस्त 2029, पटना, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 1 अगस्त 2029 को पटना में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण सप्तमी (03:34, 2 अग॰ तक), नक्षत्र रेवती (08:03 तक) और योग धृति है। सूर्योदय 05:16 पर और सूर्यास्त 18:35 पर है। राहुकाल 11:55 से 13:35 तक है।

दिन और रात
दिन 05:16 – 18:35
रात 05:16 तक
तिथि
सप्तमी, 03:34 तक
अष्टमी
नक्षत्र
रेवती, 08:03 तक
अश्विनी
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

1 अगस्त 2029 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण सप्तमी 03:34, 2 अग॰ तक
कृष्ण अष्टमी 05:54, 3 अग॰ तक
नक्षत्र
रेवती 08:03 तक
अश्विनी 11:00, 2 अग॰ तक
योग
धृति 11:24 तक
शूलअशुभ 12:21, 2 अग॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 14:22 तक
बव 03:33, 2 अग॰ तक
बालव 16:45, 2 अग॰ तक
चंद्र राशि
मीन 08:03 तक
सूर्य राशिकर्क
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:16
सूर्यास्त
18:35
चंद्रोदय
22:25
चंद्रास्त
11:05
दिनमान
13h 19m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आषाढ़
मास (पूर्णिमांत)
श्रावण
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:50 – 04:33
अभिजीत मुहूर्त
11:28 – 12:22 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
11:55 – 13:35
यमगंड
06:55 – 08:35
गुलिक काल
10:15 – 11:55

1 अगस्त 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:16 – 06:55शुभ
अमृत06:55 – 08:35शुभ
काल08:35 – 10:15टालें
शुभ10:15 – 11:55शुभ
रोग11:55 – 13:35टालें
उद्वेग13:35 – 15:15टालें
चर15:15 – 16:55सामान्य
लाभ16:55 – 18:35शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग18:35 – 19:55टालें
शुभ19:55 – 21:15शुभ
अमृत21:15 – 22:35शुभ
चर22:35 – 23:55सामान्य
रोग23:55 – 01:16टालें
काल01:16 – 02:36टालें
लाभ02:36 – 03:56शुभ
उद्वेग03:56 – 05:16टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:1606:22दिन
चंद्र06:2207:29दिन
शनि07:2908:35दिन
गुरु08:3509:42दिन
मंगल09:4210:49दिन
सूर्य10:4911:55दिन
शुक्र11:5513:02दिन
बुध13:0214:08दिन
चंद्र14:0815:15दिन
शनि15:1516:21दिन
गुरु16:2117:28दिन
मंगल17:2818:35दिन
सूर्य18:3519:28रात
शुक्र19:2820:22रात
बुध20:2221:15रात
चंद्र21:1522:08रात
शनि22:0823:02रात
गुरु23:0223:55रात
मंगल23:5500:49रात
सूर्य00:4901:42रात
शुक्र01:4202:36रात
बुध02:3603:29रात
चंद्र03:2904:23रात
शनि04:2305:16रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
2 अग॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
6 अग॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
8 अग॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
10 अग॰ 2029श्रावण अमावस्याअमावस्या
13 अग॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 अग॰ 2029सिंह संक्रांतिसूर्य का सिंह में प्रवेश
20 अग॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
22 अग॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
24 अग॰ 2029श्रावण पूर्णिमापूर्णिमा
28 अग॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां पटना में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2703° (लाहिड़ी)। समय पटना (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।