20 अगस्त 2029 को पटना का पंचांग

सोमवार, 20 अगस्त 2029, पटना, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 20 अगस्त 2029 को पटना में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल एकादशी (07:30 तक), नक्षत्र पूर्वाषाढ़ा (04:26, 21 अग॰ तक) और योग प्रीति है। सूर्योदय 05:24 पर और सूर्यास्त 18:20 पर है। राहुकाल 07:01 से 08:38 तक है।

दिन और रात
दिन 05:24 – 18:20
रात 05:25 तक
तिथि
द्वादशी
नक्षत्र
पूर्वाषाढ़ा, 04:26 तक
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

20 अगस्त 2029 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
शुक्ल एकादशी 07:30 तक
शुक्ल द्वादशी 06:53, 21 अग॰ तक
नक्षत्र
पूर्वाषाढ़ा 04:26, 21 अग॰ तक
उत्तराषाढ़ा 04:51, 22 अग॰ तक
योग
प्रीति 21:47 तक
आयुष्मान 20:27, 21 अग॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 07:30 तक
बव 19:09 तक
बालव 06:53, 21 अग॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिसिंह
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:24
सूर्यास्त
18:20
चंद्रोदय
15:37
चंद्रास्त
01:34
दिनमान
12h 56m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
श्रावण
मास (पूर्णिमांत)
श्रावण
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:56 – 04:40
अभिजीत मुहूर्त
11:26 – 12:18

अशुभ समय

राहुकाल
07:01 – 08:38
यमगंड
10:15 – 11:52
गुलिक काल
13:29 – 15:06

20 अगस्त 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत05:24 – 07:01शुभ
काल07:01 – 08:38टालें
शुभ08:38 – 10:15शुभ
रोग10:15 – 11:52टालें
उद्वेग11:52 – 13:29टालें
चर13:29 – 15:06सामान्य
लाभ15:06 – 16:43शुभ
अमृत16:43 – 18:20शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर18:20 – 19:43सामान्य
रोग19:43 – 21:06टालें
काल21:06 – 22:29टालें
लाभ22:29 – 23:52शुभ
उद्वेग23:52 – 01:15टालें
शुभ01:15 – 02:39शुभ
अमृत02:39 – 04:02शुभ
चर04:02 – 05:25सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र05:2406:29दिन
शनि06:2907:34दिन
गुरु07:3408:38दिन
मंगल08:3809:43दिन
सूर्य09:4310:48दिन
शुक्र10:4811:52दिन
बुध11:5212:57दिन
चंद्र12:5714:01दिन
शनि14:0115:06दिन
गुरु15:0616:11दिन
मंगल16:1117:15दिन
सूर्य17:1518:20दिन
शुक्र18:2019:15रात
बुध19:1520:11रात
चंद्र20:1121:06रात
शनि21:0622:02रात
गुरु22:0222:57रात
मंगल22:5723:52रात
सूर्य23:5200:48रात
शुक्र00:4801:43रात
बुध01:4302:39रात
चंद्र02:3903:34रात
शनि03:3404:29रात
गुरु04:2905:25रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
20 अग॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
22 अग॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
24 अग॰ 2029श्रावण पूर्णिमापूर्णिमा
28 अग॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
1 सित॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
4 सित॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
6 सित॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
8 सित॰ 2029भाद्रपद अमावस्याअमावस्या
11 सित॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 सित॰ 2029कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश
18 सित॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी

तिथियां पटना में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2710° (लाहिड़ी)। समय पटना (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।