15 अक्टूबर 2033 को पटना का पंचांग

शनिवार, 15 अक्टूबर 2033, पटना, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 15 अक्टूबर 2033 को पटना में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण अष्टमी (22:24 तक), नक्षत्र पुनर्वसु (20:33 तक) और योग शिव है। सूर्योदय 05:48 पर और सूर्यास्त 17:22 पर है। राहुकाल 08:41 से 10:08 तक है।

दिन और रात
दिन 05:48 – 17:22
रात 05:48 तक
तिथि
अष्टमी, 22:24 तक
नवमी
नक्षत्र
पुनर्वसु, 20:33 तक
पुष्य
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

15 अक्टूबर 2033 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
कृष्ण अष्टमी 22:24 तक
कृष्ण नवमी 23:10, 16 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
पुष्य 21:52, 16 अक्टू॰ तक
योग
शिव 12:03 तक
सिद्ध 11:18, 16 अक्टू॰ तक
करण
बालव 10:17 तक
कौलव 22:24 तक
तैतिल 10:41, 16 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
मिथुन 14:19 तक
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:48
सूर्यास्त
17:22
चंद्रोदय
23:43
चंद्रास्त
12:21
दिनमान
11h 34m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2090
शक संवत
1955, प्रमादी संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:08 – 04:58
अभिजीत मुहूर्त
11:11 – 11:58

अशुभ समय

राहुकाल
08:41 – 10:08
यमगंड
13:01 – 14:28
गुलिक काल
05:48 – 07:14

15 अक्टूबर 2033 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल05:48 – 07:14टालें
शुभ07:14 – 08:41शुभ
रोग08:41 – 10:08टालें
उद्वेग10:08 – 11:35टालें
चर11:35 – 13:01सामान्य
लाभ13:01 – 14:28शुभ
अमृत14:28 – 15:55शुभ
काल15:55 – 17:22टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ17:22 – 18:55शुभ
उद्वेग18:55 – 20:28टालें
शुभ20:28 – 22:01शुभ
अमृत22:01 – 23:35शुभ
चर23:35 – 01:08सामान्य
रोग01:08 – 02:41टालें
काल02:41 – 04:15टालें
लाभ04:15 – 05:48शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि05:4806:45दिन
गुरु06:4507:43दिन
मंगल07:4308:41दिन
सूर्य08:4109:39दिन
शुक्र09:3910:37दिन
बुध10:3711:35दिन
चंद्र11:3512:32दिन
शनि12:3213:30दिन
गुरु13:3014:28दिन
मंगल14:2815:26दिन
सूर्य15:2616:24दिन
शुक्र16:2417:22दिन
बुध17:2218:24रात
चंद्र18:2419:26रात
शनि19:2620:28रात
गुरु20:2821:30रात
मंगल21:3022:33रात
सूर्य22:3323:35रात
शुक्र23:3500:37रात
बुध00:3701:39रात
चंद्र01:3902:41रात
शनि02:4103:44रात
गुरु03:4404:46रात
मंगल04:4605:48रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
15 अक्टू॰ 2033कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
17 अक्टू॰ 2033तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
18 अक्टू॰ 2033कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
20 अक्टू॰ 2033प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
23 अक्टू॰ 2033कार्तिक अमावस्याअमावस्या
27 अक्टू॰ 2033विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
3 नव॰ 2033शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
5 नव॰ 2033प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
6 नव॰ 2033कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
10 नव॰ 2033संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां पटना में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.3290° (लाहिड़ी)। समय पटना (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।