21 नवंबर 2042 को पटना का पंचांग

शुक्रवार, 21 नवंबर 2042, पटना, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 21 नवंबर 2042 को पटना में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल अष्टमी (07:24 तक), नक्षत्र शतभिषा (23:59 तक) और योग व्याघात है। सूर्योदय 06:11 पर और सूर्यास्त 16:59 पर है। राहुकाल 10:14 से 11:35 तक है।

दिन और रात
दिन 06:11 – 16:59
रात 06:11 तक
तिथि
नवमी, 05:44 तक
नक्षत्र
शतभिषा, 23:59 तक
पूर्वा भाद्रपद
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

21 नवंबर 2042 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
शुक्ल अष्टमी 07:24 तक
शुक्ल नवमी 05:44, 22 नव॰ तक
शुक्ल दशमी 03:32, 23 नव॰ तक
नक्षत्र
शतभिषा 23:59 तक
पूर्वा भाद्रपद 22:36, 22 नव॰ तक
योग
व्याघातअशुभ 21:07 तक
हर्षण 18:18, 22 नव॰ तक
करण
बव 07:24 तक
बालव 18:38 तक
कौलव 05:44, 22 नव॰ तक
तैतिल 16:42, 22 नव॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:11
सूर्यास्त
16:59
चंद्रोदय
12:54
चंद्रास्त
इस दिन चंद्रास्त नहीं
दिनमान
10h 48m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2099
शक संवत
1964, दुंदुभि संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:25 – 05:18
अभिजीत मुहूर्त
11:13 – 11:56

अशुभ समय

राहुकाल
10:14 – 11:35
यमगंड
14:17 – 15:38
गुलिक काल
07:32 – 08:53

21 नवंबर 2042 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर06:11 – 07:32सामान्य
लाभ07:32 – 08:53शुभ
अमृत08:53 – 10:14शुभ
काल10:14 – 11:35टालें
शुभ11:35 – 12:56शुभ
रोग12:56 – 14:17टालें
उद्वेग14:17 – 15:38टालें
चर15:38 – 16:59सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग16:59 – 18:38टालें
काल18:38 – 20:17टालें
लाभ20:17 – 21:56शुभ
उद्वेग21:56 – 23:35टालें
शुभ23:35 – 01:14शुभ
अमृत01:14 – 02:53शुभ
चर02:53 – 04:32सामान्य
रोग04:32 – 06:11टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र06:1107:05दिन
बुध07:0507:59दिन
चंद्र07:5908:53दिन
शनि08:5309:47दिन
गुरु09:4710:41दिन
मंगल10:4111:35दिन
सूर्य11:3512:29दिन
शुक्र12:2913:23दिन
बुध13:2314:17दिन
चंद्र14:1715:11दिन
शनि15:1116:05दिन
गुरु16:0516:59दिन
मंगल16:5918:05रात
सूर्य18:0519:11रात
शुक्र19:1120:17रात
बुध20:1721:23रात
चंद्र21:2322:29रात
शनि22:2923:35रात
गुरु23:3500:41रात
मंगल00:4101:47रात
सूर्य01:4702:53रात
शुक्र02:5303:59रात
बुध03:5905:05रात
चंद्र05:0506:11रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
23 नव॰ 2042शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
25 नव॰ 2042प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
27 नव॰ 2042कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
30 नव॰ 2042संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
4 दिस॰ 2042कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
8 दिस॰ 2042कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
10 दिस॰ 2042प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
12 दिस॰ 2042मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
16 दिस॰ 2042विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
16 दिस॰ 2042धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश

तिथियां पटना में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.4562° (लाहिड़ी)। समय पटना (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।