27 नवंबर 2053 को पटना का पंचांग

गुरुवार, 27 नवंबर 2053, पटना, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 27 नवंबर 2053 को पटना में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण द्वितीया (21:38 तक), नक्षत्र मृगशिरा (23:53 तक) और योग सिद्ध है। सूर्योदय 06:15 पर और सूर्यास्त 16:58 पर है। राहुकाल 12:57 से 14:17 तक है।

दिन और रात
दिन 06:15 – 16:58
रात 06:16 तक
तिथि
द्वितीया, 21:38 तक
तृतीया
नक्षत्र
मृगशिरा, 23:53 तक
आर्द्रा
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

27 नवंबर 2053 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
कृष्ण द्वितीया 21:38 तक
कृष्ण तृतीया 18:26, 28 नव॰ तक
नक्षत्र
आर्द्रा 21:26, 28 नव॰ तक
योग
सिद्ध 11:46 तक
साध्य 07:54, 28 नव॰ तक
करण
तैतिल 11:14 तक
गर 21:38 तक
वणिज 08:01, 28 नव॰ तक
चंद्र राशि
वृषभ 13:08 तक
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:15
सूर्यास्त
16:58
चंद्रोदय
18:37
चंद्रास्त
07:21
दिनमान
10h 43m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2110
शक संवत
1975, श्रीमुख संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:29 – 05:22
अभिजीत मुहूर्त
11:15 – 11:58

अशुभ समय

राहुकाल
12:57 – 14:17
यमगंड
06:15 – 07:36
गुलिक काल
08:56 – 10:16

27 नवंबर 2053 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ06:15 – 07:36शुभ
रोग07:36 – 08:56टालें
उद्वेग08:56 – 10:16टालें
चर10:16 – 11:36सामान्य
लाभ11:36 – 12:57शुभ
अमृत12:57 – 14:17शुभ
काल14:17 – 15:37टालें
शुभ15:37 – 16:58शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत16:58 – 18:38शुभ
चर18:38 – 20:17सामान्य
रोग20:17 – 21:57टालें
काल21:57 – 23:37टालें
लाभ23:37 – 01:17शुभ
उद्वेग01:17 – 02:56टालें
शुभ02:56 – 04:36शुभ
अमृत04:36 – 06:16शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु06:1507:09दिन
मंगल07:0908:02दिन
सूर्य08:0208:56दिन
शुक्र08:5609:49दिन
बुध09:4910:43दिन
चंद्र10:4311:36दिन
शनि11:3612:30दिन
गुरु12:3013:24दिन
मंगल13:2414:17दिन
सूर्य14:1715:11दिन
शुक्र15:1116:04दिन
बुध16:0416:58दिन
चंद्र16:5818:04रात
शनि18:0419:11रात
गुरु19:1120:17रात
मंगल20:1721:24रात
सूर्य21:2422:30रात
शुक्र22:3023:37रात
बुध23:3700:43रात
चंद्र00:4301:50रात
शनि01:5002:56रात
गुरु02:5604:03रात
मंगल04:0305:09रात
सूर्य05:0906:16रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
29 नव॰ 2053संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
3 दिस॰ 2053कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
5 दिस॰ 2053कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
7 दिस॰ 2053प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
10 दिस॰ 2053मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
14 दिस॰ 2053विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
16 दिस॰ 2053धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश
21 दिस॰ 2053शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
23 दिस॰ 2053प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
25 दिस॰ 2053मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां पटना में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.6101° (लाहिड़ी)। समय पटना (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।