13 नवंबर 2062 को पटना का पंचांग

सोमवार, 13 नवंबर 2062, पटना, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 13 नवंबर 2062 को पटना में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल एकादशी (06:14 तक), नक्षत्र उत्तरा भाद्रपद (22:03 तक) और योग हर्षण है। सूर्योदय 06:05 पर और सूर्यास्त 17:01 पर है। राहुकाल 07:27 से 08:49 तक है।

दिन और रात
दिन 06:05 – 17:01
रात 06:06 तक
तिथि
द्वादशी
नक्षत्र
उत्तरा भाद्रपद, 22:03 तक
रेवती
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

13 नवंबर 2062 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
शुक्ल एकादशी 06:14 तक
शुक्ल द्वादशी 06:20, 14 नव॰ तक
नक्षत्र
रेवती 22:15, 14 नव॰ तक
योग
हर्षण 10:15 तक
वज्रअशुभ 09:05, 14 नव॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 06:14 तक
बव 18:23 तक
बालव 06:20, 14 नव॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:05
सूर्यास्त
17:01
चंद्रोदय
14:35
चंद्रास्त
02:23
दिनमान
10h 56m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2119
शक संवत
1984, चित्रभानु संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:21 – 05:13
अभिजीत मुहूर्त
11:11 – 11:55

अशुभ समय

राहुकाल
07:27 – 08:49
यमगंड
10:11 – 11:33
गुलिक काल
12:55 – 14:17

13 नवंबर 2062 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत06:05 – 07:27शुभ
काल07:27 – 08:49टालें
शुभ08:49 – 10:11शुभ
रोग10:11 – 11:33टालें
उद्वेग11:33 – 12:55टालें
चर12:55 – 14:17सामान्य
लाभ14:17 – 15:39शुभ
अमृत15:39 – 17:01शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर17:01 – 18:39सामान्य
रोग18:39 – 20:17टालें
काल20:17 – 21:55टालें
लाभ21:55 – 23:33शुभ
उद्वेग23:33 – 01:11टालें
शुभ01:11 – 02:50शुभ
अमृत02:50 – 04:28शुभ
चर04:28 – 06:06सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र06:0507:00दिन
शनि07:0007:54दिन
गुरु07:5408:49दिन
मंगल08:4909:44दिन
सूर्य09:4410:38दिन
शुक्र10:3811:33दिन
बुध11:3312:28दिन
चंद्र12:2813:22दिन
शनि13:2214:17दिन
गुरु14:1715:12दिन
मंगल15:1216:06दिन
सूर्य16:0617:01दिन
शुक्र17:0118:06रात
बुध18:0619:12रात
चंद्र19:1220:17रात
शनि20:1721:23रात
गुरु21:2322:28रात
मंगल22:2823:33रात
सूर्य23:3300:39रात
शुक्र00:3901:44रात
बुध01:4402:50रात
चंद्र02:5003:55रात
शनि03:5505:00रात
गुरु05:0006:06रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
14 नव॰ 2062प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
16 नव॰ 2062कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
17 नव॰ 2062वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
20 नव॰ 2062संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
24 नव॰ 2062कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
26 नव॰ 2062कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
28 नव॰ 2062प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
30 नव॰ 2062मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
5 दिस॰ 2062विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
12 दिस॰ 2062शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी

तिथियां पटना में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.7353° (लाहिड़ी)। समय पटना (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।