19 नवंबर 2086 को पटना का पंचांग

मंगलवार, 19 नवंबर 2086, पटना, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 19 नवंबर 2086 को पटना में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल त्रयोदशी (08:18 तक), नक्षत्र अश्विनी (16:36 तक) और योग व्यतीपात है। सूर्योदय 06:09 पर और सूर्यास्त 16:59 पर है। राहुकाल 14:17 से 15:38 तक है।

दिन और रात
दिन 06:09 – 16:59
रात 06:10 तक
तिथि
चतुर्दशी, 04:56 तक
नक्षत्र
अश्विनी, 16:36 तक
भरणी
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

19 नवंबर 2086 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
शुक्ल त्रयोदशी 08:18 तक
शुक्ल चतुर्दशी 04:56, 20 नव॰ तक
पूर्णिमा 01:43, 21 नव॰ तक
नक्षत्र
भरणी 14:01, 20 नव॰ तक
योग
व्यतीपातअशुभ 17:51 तक
वरीयान 13:55, 20 नव॰ तक
करण
तैतिल 08:18 तक
गर 18:37 तक
वणिज 04:56, 20 नव॰ तक
विष्टि (भद्रा) 15:18, 20 नव॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:09
सूर्यास्त
16:59
चंद्रोदय
15:40
चंद्रास्त
04:13
दिनमान
10h 50m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2143
शक संवत
2008, पराभव संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:24 – 05:17
अभिजीत मुहूर्त
11:13 – 11:56

अशुभ समय

राहुकाल
14:17 – 15:38
यमगंड
08:52 – 10:13
गुलिक काल
11:34 – 12:55

19 नवंबर 2086 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग06:09 – 07:31टालें
उद्वेग07:31 – 08:52टालें
चर08:52 – 10:13सामान्य
लाभ10:13 – 11:34शुभ
अमृत11:34 – 12:55शुभ
काल12:55 – 14:17टालें
शुभ14:17 – 15:38शुभ
रोग15:38 – 16:59टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल16:59 – 18:38टालें
लाभ18:38 – 20:17शुभ
उद्वेग20:17 – 21:56टालें
शुभ21:56 – 23:35शुभ
अमृत23:35 – 01:13शुभ
चर01:13 – 02:52सामान्य
रोग02:52 – 04:31टालें
काल04:31 – 06:10टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल06:0907:03दिन
सूर्य07:0307:58दिन
शुक्र07:5808:52दिन
बुध08:5209:46दिन
चंद्र09:4610:40दिन
शनि10:4011:34दिन
गुरु11:3412:28दिन
मंगल12:2813:22दिन
सूर्य13:2214:17दिन
शुक्र14:1715:11दिन
बुध15:1116:05दिन
चंद्र16:0516:59दिन
शनि16:5918:05रात
गुरु18:0519:11रात
मंगल19:1120:17रात
सूर्य20:1721:23रात
शुक्र21:2322:29रात
बुध22:2923:35रात
चंद्र23:3500:40रात
शनि00:4001:46रात
गुरु01:4602:52रात
मंगल02:5203:58रात
सूर्य03:5805:04रात
शुक्र05:0406:10रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
19 नव॰ 2086प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
20 नव॰ 2086कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
24 नव॰ 2086संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
28 नव॰ 2086कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
1 दिस॰ 2086कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
3 दिस॰ 2086प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
6 दिस॰ 2086मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
10 दिस॰ 2086विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
16 दिस॰ 2086शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
16 दिस॰ 2086धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश
18 दिस॰ 2086प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी

तिथियां पटना में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 25.0709° (लाहिड़ी)। समय पटना (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।