1 जनवरी 2025 को पर्थ का पंचांग

बुधवार, 1 जनवरी 2025, पर्थ, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Perth में है।

बुधवार, 1 जनवरी 2025 को पर्थ में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल प्रतिपदा (05:52 तक), नक्षत्र उत्तराषाढ़ा (02:16, 2 जन॰ तक) और योग व्याघात है। सूर्योदय 05:14 पर और सूर्यास्त 19:25 पर है। राहुकाल 12:20 से 14:06 तक है।

दिन और रात
दिन 05:14 – 19:25
रात 05:14 तक
तिथि
द्वितीया, 04:54 तक
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा, 02:16 तक
श्रवण
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

1 जनवरी 2025 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
शुक्ल प्रतिपदा 05:52 तक
शुक्ल द्वितीया 04:54, 2 जन॰ तक
शुक्ल तृतीया 03:38, 3 जन॰ तक
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा 02:16, 2 जन॰ तक
श्रवण 01:40, 3 जन॰ तक
योग
व्याघातअशुभ 19:36 तक
हर्षण 17:27, 2 जन॰ तक
करण
बव 05:52 तक
बालव 17:26 तक
कौलव 04:54, 2 जन॰ तक
तैतिल 16:18, 2 जन॰ तक
चंद्र राशि
धनु 08:31 तक
सूर्य राशिधनु
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:14
सूर्यास्त
19:25
चंद्रोदय
06:04
चंद्रास्त
20:52
दिनमान
14h 12m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2081
शक संवत
1946, क्रोधी संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:55 – 04:34
अभिजीत मुहूर्त
11:51 – 12:48 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:20 – 14:06
यमगंड
07:00 – 08:47
गुलिक काल
10:33 – 12:20

1 जनवरी 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:14 – 07:00शुभ
अमृत07:00 – 08:47शुभ
काल08:47 – 10:33टालें
शुभ10:33 – 12:20शुभ
रोग12:20 – 14:06टालें
उद्वेग14:06 – 15:52टालें
चर15:52 – 17:39सामान्य
लाभ17:39 – 19:25शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग19:25 – 20:39टालें
शुभ20:39 – 21:53शुभ
अमृत21:53 – 23:06शुभ
चर23:06 – 00:20सामान्य
रोग00:20 – 01:33टालें
काल01:33 – 02:47टालें
लाभ02:47 – 04:01शुभ
उद्वेग04:01 – 05:14टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:1406:25दिन
चंद्र06:2507:36दिन
शनि07:3608:47दिन
गुरु08:4709:58दिन
मंगल09:5811:09दिन
सूर्य11:0912:20दिन
शुक्र12:2013:30दिन
बुध13:3014:41दिन
चंद्र14:4115:52दिन
शनि15:5217:03दिन
गुरु17:0318:14दिन
मंगल18:1419:25दिन
सूर्य19:2520:15रात
शुक्र20:1521:04रात
बुध21:0421:53रात
चंद्र21:5322:42रात
शनि22:4223:31रात
गुरु23:3100:20रात
मंगल00:2001:09रात
सूर्य01:0901:58रात
शुक्र01:5802:47रात
बुध02:4703:36रात
चंद्र03:3604:25रात
शनि04:2505:14रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
3 जन॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
10 जन॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
12 जन॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
14 जन॰ 2025पौष पूर्णिमापूर्णिमा
14 जन॰ 2025मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
18 जन॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
22 जन॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
25 जन॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
27 जन॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
29 जन॰ 2025माघ अमावस्याअमावस्या

तिथियां पर्थ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2063° (लाहिड़ी)। समय पर्थ (Australia/Perth) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।