6 जनवरी 2025 को पर्थ का पंचांग

सोमवार, 6 जनवरी 2025, पर्थ, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Perth में है।

सोमवार, 6 जनवरी 2025 को पर्थ में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल सप्तमी (20:54 तक), नक्षत्र उत्तरा भाद्रपद (21:36 तक) और योग वरीयान है। सूर्योदय 05:17 पर और सूर्यास्त 19:26 पर है। राहुकाल 07:03 से 08:50 तक है।

दिन और रात
दिन 05:17 – 19:26
रात 05:18 तक
तिथि
सप्तमी, 20:54 तक
अष्टमी
नक्षत्र
उत्तरा भाद्रपद, 21:36 तक
रेवती
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

6 जनवरी 2025 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
शुक्ल सप्तमी 20:54 तक
शुक्ल अष्टमी 18:57, 7 जन॰ तक
नक्षत्र
रेवती 20:20, 7 जन॰ तक
योग
वरीयान 07:20 तक
परिघअशुभ 04:35, 7 जन॰ तक
शिव 01:45, 8 जन॰ तक
करण
गर 09:50 तक
वणिज 20:54 तक
विष्टि (भद्रा) 07:56, 7 जन॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिधनु
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:17
सूर्यास्त
19:26
चंद्रोदय
11:37
चंद्रास्त
23:38
दिनमान
14h 9m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2081
शक संवत
1946, क्रोधी संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:59 – 04:38
अभिजीत मुहूर्त
11:53 – 12:50

अशुभ समय

राहुकाल
07:03 – 08:50
यमगंड
10:36 – 12:22
गुलिक काल
14:08 – 15:54

6 जनवरी 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत05:17 – 07:03शुभ
काल07:03 – 08:50टालें
शुभ08:50 – 10:36शुभ
रोग10:36 – 12:22टालें
उद्वेग12:22 – 14:08टालें
चर14:08 – 15:54सामान्य
लाभ15:54 – 17:40शुभ
अमृत17:40 – 19:26शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर19:26 – 20:40सामान्य
रोग20:40 – 21:54टालें
काल21:54 – 23:08टालें
लाभ23:08 – 00:22शुभ
उद्वेग00:22 – 01:36टालें
शुभ01:36 – 02:50शुभ
अमृत02:50 – 04:04शुभ
चर04:04 – 05:18सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र05:1706:28दिन
शनि06:2807:39दिन
गुरु07:3908:50दिन
मंगल08:5010:00दिन
सूर्य10:0011:11दिन
शुक्र11:1112:22दिन
बुध12:2213:32दिन
चंद्र13:3214:43दिन
शनि14:4315:54दिन
गुरु15:5417:05दिन
मंगल17:0518:15दिन
सूर्य18:1519:26दिन
शुक्र19:2620:15रात
बुध20:1521:05रात
चंद्र21:0521:54रात
शनि21:5422:43रात
गुरु22:4323:33रात
मंगल23:3300:22रात
सूर्य00:2201:12रात
शुक्र01:1202:01रात
बुध02:0102:50रात
चंद्र02:5003:40रात
शनि03:4004:29रात
गुरु04:2905:18रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
10 जन॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
12 जन॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
14 जन॰ 2025पौष पूर्णिमापूर्णिमा
14 जन॰ 2025मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
18 जन॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
22 जन॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
25 जन॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
27 जन॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
29 जन॰ 2025माघ अमावस्याअमावस्या
2 फ़र॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां पर्थ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2065° (लाहिड़ी)। समय पर्थ (Australia/Perth) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।