29 जनवरी 2025 को पर्थ का पंचांग

बुधवार, 29 जनवरी 2025, पर्थ, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Perth में है।

बुधवार, 29 जनवरी 2025 को पर्थ में सूर्योदय के समय तिथि अमावस्या (20:36 तक), नक्षत्र उत्तराषाढ़ा (10:50 तक) और योग सिद्धि है। सूर्योदय 05:38 पर और सूर्यास्त 19:20 पर है। राहुकाल 12:29 से 14:12 तक है।

दिन और रात
दिन 05:38 – 19:20
रात 05:39 तक
तिथि
अमावस्या, 20:36 तक
प्रतिपदा
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा, 10:50 तक
श्रवण
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

29 जनवरी 2025 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
अमावस्या 20:36 तक
शुक्ल प्रतिपदा 18:41, 30 जन॰ तक
नक्षत्र
श्रवण 09:45, 30 जन॰ तक
योग
सिद्धि 23:51 तक
व्यतीपातअशुभ 21:03, 30 जन॰ तक
करण
चतुष्पद 09:24 तक
नाग 20:36 तक
किंस्तुघ्न 07:41, 30 जन॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमकर
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:38
सूर्यास्त
19:20
चंद्रोदय
04:54
चंद्रास्त
19:28
दिनमान
13h 41m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2081
शक संवत
1946, क्रोधी संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:16 – 04:57
अभिजीत मुहूर्त
12:02 – 12:56 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:29 – 14:12
यमगंड
07:21 – 09:04
गुलिक काल
10:46 – 12:29

29 जनवरी 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:38 – 07:21शुभ
अमृत07:21 – 09:04शुभ
काल09:04 – 10:46टालें
शुभ10:46 – 12:29शुभ
रोग12:29 – 14:12टालें
उद्वेग14:12 – 15:54टालें
चर15:54 – 17:37सामान्य
लाभ17:37 – 19:20शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग19:20 – 20:37टालें
शुभ20:37 – 21:54शुभ
अमृत21:54 – 23:12शुभ
चर23:12 – 00:29सामान्य
रोग00:29 – 01:47टालें
काल01:47 – 03:04टालें
लाभ03:04 – 04:22शुभ
उद्वेग04:22 – 05:39टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:3806:47दिन
चंद्र06:4707:55दिन
शनि07:5509:04दिन
गुरु09:0410:12दिन
मंगल10:1211:20दिन
सूर्य11:2012:29दिन
शुक्र12:2913:37दिन
बुध13:3714:46दिन
चंद्र14:4615:54दिन
शनि15:5417:03दिन
गुरु17:0318:11दिन
मंगल18:1119:20दिन
सूर्य19:2020:11रात
शुक्र20:1121:03रात
बुध21:0321:54रात
चंद्र21:5422:46रात
शनि22:4623:38रात
गुरु23:3800:29रात
मंगल00:2901:21रात
सूर्य01:2102:13रात
शुक्र02:1303:04रात
बुध03:0403:56रात
चंद्र03:5604:48रात
शनि04:4805:39रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
29 जन॰ 2025माघ अमावस्याअमावस्या
2 फ़र॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
8 फ़र॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
10 फ़र॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
12 फ़र॰ 2025माघ पूर्णिमापूर्णिमा
13 फ़र॰ 2025कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
16 फ़र॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
21 फ़र॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
24 फ़र॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
26 फ़र॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां पर्थ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2074° (लाहिड़ी)। समय पर्थ (Australia/Perth) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।