3 अक्टूबर 2025 को पर्थ का पंचांग

शुक्रवार, 3 अक्टूबर 2025, पर्थ, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Perth में है।

शुक्रवार, 3 अक्टूबर 2025 को पर्थ में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल एकादशी (21:03 तक), नक्षत्र श्रवण (12:04 तक) और योग धृति है। सूर्योदय 05:51 पर और सूर्यास्त 18:19 पर है। राहुकाल 10:32 से 12:05 तक है।

दिन और रात
दिन 05:51 – 18:19
रात 05:50 तक
तिथि
एकादशी, 21:03 तक
द्वादशी
नक्षत्र
श्रवण, 12:04 तक
धनिष्ठा
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

3 अक्टूबर 2025 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
शुक्ल एकादशी 21:03 तक
शुक्ल द्वादशी 19:39, 4 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
श्रवण 12:04 तक
धनिष्ठा 11:39, 4 अक्टू॰ तक
योग
धृति 00:15, 4 अक्टू॰ तक
शूलअशुभ 21:56, 4 अक्टू॰ तक
करण
वणिज 09:28 तक
विष्टि (भद्रा) 21:03 तक
बव 08:27, 4 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
मकर 23:57 तक
सूर्य राशिकन्या
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:51
सूर्यास्त
18:19
चंद्रोदय
14:10
चंद्रास्त
03:25
दिनमान
12h 28m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:19 – 05:05
अभिजीत मुहूर्त
11:40 – 12:30

अशुभ समय

राहुकाल
10:32 – 12:05
यमगंड
15:12 – 16:46
गुलिक काल
07:25 – 08:58

3 अक्टूबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर05:51 – 07:25सामान्य
लाभ07:25 – 08:58शुभ
अमृत08:58 – 10:32शुभ
काल10:32 – 12:05टालें
शुभ12:05 – 13:39शुभ
रोग13:39 – 15:12टालें
उद्वेग15:12 – 16:46टालें
चर16:46 – 18:19सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग18:19 – 19:46टालें
काल19:46 – 21:12टालें
लाभ21:12 – 22:38शुभ
उद्वेग22:38 – 00:05टालें
शुभ00:05 – 01:31शुभ
अमृत01:31 – 02:57शुभ
चर02:57 – 04:24सामान्य
रोग04:24 – 05:50टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र05:5106:54दिन
बुध06:5407:56दिन
चंद्र07:5608:58दिन
शनि08:5810:01दिन
गुरु10:0111:03दिन
मंगल11:0312:05दिन
सूर्य12:0513:08दिन
शुक्र13:0814:10दिन
बुध14:1015:12दिन
चंद्र15:1216:15दिन
शनि16:1517:17दिन
गुरु17:1718:19दिन
मंगल18:1919:17रात
सूर्य19:1720:14रात
शुक्र20:1421:12रात
बुध21:1222:10रात
चंद्र22:1023:07रात
शनि23:0700:05रात
गुरु00:0501:02रात
मंगल01:0202:00रात
सूर्य02:0002:57रात
शुक्र02:5703:55रात
बुध03:5504:53रात
चंद्र04:5305:50रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
3 अक्टू॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
5 अक्टू॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
7 अक्टू॰ 2025आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
10 अक्टू॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
14 अक्टू॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
17 अक्टू॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
17 अक्टू॰ 2025तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
19 अक्टू॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
21 अक्टू॰ 2025कार्तिक अमावस्याअमावस्या
25 अक्टू॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां पर्थ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2168° (लाहिड़ी)। समय पर्थ (Australia/Perth) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।