5 नवंबर 2025 को पर्थ का पंचांग

बुधवार, 5 नवंबर 2025, पर्थ, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Perth में है।

बुधवार, 5 नवंबर 2025 को पर्थ में सूर्योदय के समय तिथि पूर्णिमा (21:19 तक), नक्षत्र अश्विनी (12:10 तक) और योग सिद्धि है। सूर्योदय 05:15 पर और सूर्यास्त 18:45 पर है। राहुकाल 12:00 से 13:41 तक है।

दिन और रात
दिन 05:15 – 18:45
रात 05:14 तक
तिथि
पूर्णिमा, 21:19 तक
प्रतिपदा
नक्षत्र
अश्विनी, 12:10 तक
भरणी
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

5 नवंबर 2025 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
पूर्णिमा 21:19 तक
कृष्ण प्रतिपदा 17:25, 6 नव॰ तक
नक्षत्र
भरणी 09:04, 6 नव॰ तक
योग
सिद्धि 13:58 तक
व्यतीपातअशुभ 09:34, 6 नव॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 11:14 तक
बव 21:19 तक
बालव 07:22, 6 नव॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:15
सूर्यास्त
18:45
चंद्रोदय
18:39
चंद्रास्त
04:34
दिनमान
13h 29m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:51 – 04:33
अभिजीत मुहूर्त
11:33 – 12:27 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:00 – 13:41
यमगंड
06:56 – 08:38
गुलिक काल
10:19 – 12:00

5 नवंबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:15 – 06:56शुभ
अमृत06:56 – 08:38शुभ
काल08:38 – 10:19टालें
शुभ10:19 – 12:00शुभ
रोग12:00 – 13:41टालें
उद्वेग13:41 – 15:22टालें
चर15:22 – 17:03सामान्य
लाभ17:03 – 18:45शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग18:45 – 20:03टालें
शुभ20:03 – 21:22शुभ
अमृत21:22 – 22:41शुभ
चर22:41 – 23:59सामान्य
रोग23:59 – 01:18टालें
काल01:18 – 02:37टालें
लाभ02:37 – 03:56शुभ
उद्वेग03:56 – 05:14टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:1506:23दिन
चंद्र06:2307:30दिन
शनि07:3008:38दिन
गुरु08:3809:45दिन
मंगल09:4510:52दिन
सूर्य10:5212:00दिन
शुक्र12:0013:07दिन
बुध13:0714:15दिन
चंद्र14:1515:22दिन
शनि15:2216:30दिन
गुरु16:3017:37दिन
मंगल17:3718:45दिन
सूर्य18:4519:37रात
शुक्र19:3720:30रात
बुध20:3021:22रात
चंद्र21:2222:14रात
शनि22:1423:07रात
गुरु23:0723:59रात
मंगल23:5900:52रात
सूर्य00:5201:44रात
शुक्र01:4402:37रात
बुध02:3703:29रात
चंद्र03:2904:22रात
शनि04:2205:14रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
5 नव॰ 2025कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
9 नव॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
12 नव॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
15 नव॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
16 नव॰ 2025वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
18 नव॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
20 नव॰ 2025मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
24 नव॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
1 दिस॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
3 दिस॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी

तिथियां पर्थ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2181° (लाहिड़ी)। समय पर्थ (Australia/Perth) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।