19 जनवरी 2026 को पर्थ का पंचांग

सोमवार, 19 जनवरी 2026, पर्थ, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Perth में है।

सोमवार, 19 जनवरी 2026 को पर्थ में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल प्रतिपदा (04:44, 20 जन॰ तक), नक्षत्र उत्तराषाढ़ा (14:22 तक) और योग वज्र है। सूर्योदय 05:29 पर और सूर्यास्त 19:24 पर है। राहुकाल 07:13 से 08:58 तक है।

दिन और रात
दिन 05:29 – 19:24
रात 05:30 तक
तिथि
प्रतिपदा, 04:44 तक
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा, 14:22 तक
श्रवण
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

19 जनवरी 2026 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
शुक्ल प्रतिपदा 04:44, 20 जन॰ तक
शुक्ल द्वितीया 05:13, 21 जन॰ तक
नक्षत्र
श्रवण 15:37, 20 जन॰ तक
योग
वज्रअशुभ 23:15 तक
सिद्धि 22:31, 20 जन॰ तक
करण
किंस्तुघ्न 16:21 तक
बव 04:44, 20 जन॰ तक
बालव 17:01, 20 जन॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमकर
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:29
सूर्यास्त
19:24
चंद्रोदय
05:31
चंद्रास्त
19:57
दिनमान
13h 56m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:08 – 04:48
अभिजीत मुहूर्त
11:59 – 12:54

अशुभ समय

राहुकाल
07:13 – 08:58
यमगंड
10:42 – 12:26
गुलिक काल
14:11 – 15:55

19 जनवरी 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत05:29 – 07:13शुभ
काल07:13 – 08:58टालें
शुभ08:58 – 10:42शुभ
रोग10:42 – 12:26टालें
उद्वेग12:26 – 14:11टालें
चर14:11 – 15:55सामान्य
लाभ15:55 – 17:40शुभ
अमृत17:40 – 19:24शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर19:24 – 20:40सामान्य
रोग20:40 – 21:56टालें
काल21:56 – 23:11टालें
लाभ23:11 – 00:27शुभ
उद्वेग00:27 – 01:43टालें
शुभ01:43 – 02:58शुभ
अमृत02:58 – 04:14शुभ
चर04:14 – 05:30सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र05:2906:38दिन
शनि06:3807:48दिन
गुरु07:4808:58दिन
मंगल08:5810:07दिन
सूर्य10:0711:17दिन
शुक्र11:1712:26दिन
बुध12:2613:36दिन
चंद्र13:3614:46दिन
शनि14:4615:55दिन
गुरु15:5517:05दिन
मंगल17:0518:15दिन
सूर्य18:1519:24दिन
शुक्र19:2420:15रात
बुध20:1521:05रात
चंद्र21:0521:56रात
शनि21:5622:46रात
गुरु22:4623:37रात
मंगल23:3700:27रात
सूर्य00:2701:17रात
शुक्र01:1702:08रात
बुध02:0802:58रात
चंद्र02:5803:49रात
शनि03:4904:39रात
गुरु04:3905:30रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
22 जन॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
29 जन॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
31 जन॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
2 फ़र॰ 2026माघ पूर्णिमापूर्णिमा
5 फ़र॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
10 फ़र॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
13 फ़र॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
13 फ़र॰ 2026कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
15 फ़र॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
17 फ़र॰ 2026फाल्गुन अमावस्याअमावस्या

तिथियां पर्थ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2209° (लाहिड़ी)। समय पर्थ (Australia/Perth) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।