25 जनवरी 2026 को पर्थ का पंचांग

रविवार, 25 जनवरी 2026, पर्थ, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Perth में है।

रविवार, 25 जनवरी 2026 को पर्थ में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल सप्तमी (01:40, 26 जन॰ तक), नक्षत्र रेवती (16:05 तक) और योग सिद्ध है। सूर्योदय 05:34 पर और सूर्यास्त 19:22 पर है। राहुकाल 17:38 से 19:22 तक है।

दिन और रात
दिन 05:34 – 19:22
रात 05:35 तक
तिथि
सप्तमी, 01:40 तक
अष्टमी
नक्षत्र
रेवती, 16:05 तक
अश्विनी
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

25 जनवरी 2026 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
शुक्ल सप्तमी 01:40, 26 जन॰ तक
शुक्ल अष्टमी 23:48, 26 जन॰ तक
नक्षत्र
रेवती 16:05 तक
अश्विनी 15:03, 26 जन॰ तक
योग
सिद्ध 14:15 तक
साध्य 11:41, 26 जन॰ तक
करण
गर 14:28 तक
वणिज 01:40, 26 जन॰ तक
विष्टि (भद्रा) 12:47, 26 जन॰ तक
चंद्र राशि
मीन 16:05 तक
सूर्य राशिमकर
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:34
सूर्यास्त
19:22
चंद्रोदय
11:43
चंद्रास्त
22:57
दिनमान
13h 48m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:13 – 04:53
अभिजीत मुहूर्त
12:00 – 12:56

अशुभ समय

राहुकाल
17:38 – 19:22
यमगंड
12:28 – 14:12
गुलिक काल
15:55 – 17:38

25 जनवरी 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग05:34 – 07:18टालें
चर07:18 – 09:01सामान्य
लाभ09:01 – 10:45शुभ
अमृत10:45 – 12:28शुभ
काल12:28 – 14:12टालें
शुभ14:12 – 15:55शुभ
रोग15:55 – 17:38टालें
उद्वेग17:38 – 19:22टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ19:22 – 20:39शुभ
अमृत20:39 – 21:55शुभ
चर21:55 – 23:12सामान्य
रोग23:12 – 00:29टालें
काल00:29 – 01:45टालें
लाभ01:45 – 03:02शुभ
उद्वेग03:02 – 04:19टालें
शुभ04:19 – 05:35शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य05:3406:43दिन
शुक्र06:4307:52दिन
बुध07:5209:01दिन
चंद्र09:0110:10दिन
शनि10:1011:19दिन
गुरु11:1912:28दिन
मंगल12:2813:37दिन
सूर्य13:3714:46दिन
शुक्र14:4615:55दिन
बुध15:5517:04दिन
चंद्र17:0418:13दिन
शनि18:1319:22दिन
गुरु19:2220:13रात
मंगल20:1321:04रात
सूर्य21:0421:55रात
शुक्र21:5522:46रात
बुध22:4623:37रात
चंद्र23:3700:29रात
शनि00:2901:20रात
गुरु01:2002:11रात
मंगल02:1103:02रात
सूर्य03:0203:53रात
शुक्र03:5304:44रात
बुध04:4405:35रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
29 जन॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
31 जन॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
2 फ़र॰ 2026माघ पूर्णिमापूर्णिमा
5 फ़र॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
10 फ़र॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
13 फ़र॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
13 फ़र॰ 2026कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
15 फ़र॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
17 फ़र॰ 2026फाल्गुन अमावस्याअमावस्या
21 फ़र॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां पर्थ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2212° (लाहिड़ी)। समय पर्थ (Australia/Perth) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।