23 फ़रवरी 2026 को पर्थ का पंचांग

सोमवार, 23 फ़रवरी 2026, पर्थ, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Perth में है।

सोमवार, 23 फ़रवरी 2026 को पर्थ में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल षष्ठी (11:39 तक), नक्षत्र भरणी (19:03 तक) और योग ब्रह्म है। सूर्योदय 06:00 पर और सूर्यास्त 18:58 पर है। राहुकाल 07:38 से 09:15 तक है।

दिन और रात
दिन 06:00 – 18:58
रात 06:01 तक
तिथि
षष्ठी, 11:39 तक
सप्तमी
नक्षत्र
भरणी, 19:03 तक
कृत्तिका
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

23 फ़रवरी 2026 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
शुक्ल षष्ठी 11:39 तक
शुक्ल सप्तमी 09:32, 24 फ़र॰ तक
नक्षत्र
भरणी 19:03 तक
कृत्तिका 17:37, 24 फ़र॰ तक
योग
ब्रह्म 12:48 तक
इंद्र 09:53, 24 फ़र॰ तक
करण
तैतिल 11:39 तक
गर 22:36 तक
वणिज 09:32, 24 फ़र॰ तक
चंद्र राशि
मेष 00:42, 24 फ़र॰ तक
सूर्य राशिकुंभ
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:00
सूर्यास्त
18:58
चंद्रोदय
11:52
चंद्रास्त
22:15
दिनमान
12h 58m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
फाल्गुन
मास (पूर्णिमांत)
फाल्गुन
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:32 – 05:16
अभिजीत मुहूर्त
12:03 – 12:55

अशुभ समय

राहुकाल
07:38 – 09:15
यमगंड
10:52 – 12:29
गुलिक काल
14:06 – 15:44

23 फ़रवरी 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत06:00 – 07:38शुभ
काल07:38 – 09:15टालें
शुभ09:15 – 10:52शुभ
रोग10:52 – 12:29टालें
उद्वेग12:29 – 14:06टालें
चर14:06 – 15:44सामान्य
लाभ15:44 – 17:21शुभ
अमृत17:21 – 18:58शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर18:58 – 20:21सामान्य
रोग20:21 – 21:44टालें
काल21:44 – 23:07टालें
लाभ23:07 – 00:30शुभ
उद्वेग00:30 – 01:52टालें
शुभ01:52 – 03:15शुभ
अमृत03:15 – 04:38शुभ
चर04:38 – 06:01सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र06:0007:05दिन
शनि07:0508:10दिन
गुरु08:1009:15दिन
मंगल09:1510:20दिन
सूर्य10:2011:24दिन
शुक्र11:2412:29दिन
बुध12:2913:34दिन
चंद्र13:3414:39दिन
शनि14:3915:44दिन
गुरु15:4416:48दिन
मंगल16:4817:53दिन
सूर्य17:5318:58दिन
शुक्र18:5819:53रात
बुध19:5320:48रात
चंद्र20:4821:44रात
शनि21:4422:39रात
गुरु22:3923:34रात
मंगल23:3400:30रात
सूर्य00:3001:25रात
शुक्र01:2502:20रात
बुध02:2003:15रात
चंद्र03:1504:11रात
शनि04:1105:06रात
गुरु05:0606:01रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
27 फ़र॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
1 मार्च 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
3 मार्च 2026फाल्गुन पूर्णिमापूर्णिमा
7 मार्च 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
11 मार्च 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
15 मार्च 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
15 मार्च 2026मीन संक्रांतिसूर्य का मीन में प्रवेश
17 मार्च 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
19 मार्च 2026चैत्र अमावस्याअमावस्या
22 मार्च 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां पर्थ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2223° (लाहिड़ी)। समय पर्थ (Australia/Perth) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।