22 सितंबर 2026 को पर्थ का पंचांग

मंगलवार, 22 सितंबर 2026, पर्थ, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Perth में है।

मंगलवार, 22 सितंबर 2026 को पर्थ में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल एकादशी (00:13, 23 सित॰ तक), नक्षत्र उत्तराषाढ़ा (09:37 तक) और योग अतिगंड है। सूर्योदय 06:06 पर और सूर्यास्त 18:12 पर है। राहुकाल 15:11 से 16:41 तक है।

दिन और रात
दिन 06:06 – 18:12
रात 06:05 तक
तिथि
एकादशी, 00:13 तक
द्वादशी
नक्षत्र
श्रवण
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

22 सितंबर 2026 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
शुक्ल एकादशी 00:13, 23 सित॰ तक
शुक्ल द्वादशी 01:20, 24 सित॰ तक
नक्षत्र
श्रवण 11:39, 23 सित॰ तक
योग
अतिगंडअशुभ 18:59 तक
सुकर्मा 18:57, 23 सित॰ तक
करण
वणिज 11:26 तक
विष्टि (भद्रा) 00:13, 23 सित॰ तक
बव 12:52, 23 सित॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:06
सूर्यास्त
18:12
चंद्रोदय
13:55
चंद्रास्त
03:28
दिनमान
12h 6m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:31 – 05:18
अभिजीत मुहूर्त
11:45 – 12:33

अशुभ समय

राहुकाल
15:11 – 16:41
यमगंड
09:08 – 10:38
गुलिक काल
12:09 – 13:40

22 सितंबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग06:06 – 07:37टालें
उद्वेग07:37 – 09:08टालें
चर09:08 – 10:38सामान्य
लाभ10:38 – 12:09शुभ
अमृत12:09 – 13:40शुभ
काल13:40 – 15:11टालें
शुभ15:11 – 16:41शुभ
रोग16:41 – 18:12टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल18:12 – 19:41टालें
लाभ19:41 – 21:10शुभ
उद्वेग21:10 – 22:39टालें
शुभ22:39 – 00:08शुभ
अमृत00:08 – 01:38शुभ
चर01:38 – 03:07सामान्य
रोग03:07 – 04:36टालें
काल04:36 – 06:05टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल06:0607:07दिन
सूर्य07:0708:07दिन
शुक्र08:0709:08दिन
बुध09:0810:08दिन
चंद्र10:0811:09दिन
शनि11:0912:09दिन
गुरु12:0913:10दिन
मंगल13:1014:10दिन
सूर्य14:1015:11दिन
शुक्र15:1116:11दिन
बुध16:1117:12दिन
चंद्र17:1218:12दिन
शनि18:1219:12रात
गुरु19:1220:11रात
मंगल20:1121:10रात
सूर्य21:1022:10रात
शुक्र22:1023:09रात
बुध23:0900:08रात
चंद्र00:0801:08रात
शनि01:0802:07रात
गुरु02:0703:07रात
मंगल03:0704:06रात
सूर्य04:0605:05रात
शुक्र05:0506:05रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
22 सित॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
24 सित॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
26 सित॰ 2026भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा
30 सित॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
4 अक्टू॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
6 अक्टू॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
8 अक्टू॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
10 अक्टू॰ 2026आश्विन अमावस्याअमावस्या
14 अक्टू॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 अक्टू॰ 2026तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश

तिथियां पर्थ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2304° (लाहिड़ी)। समय पर्थ (Australia/Perth) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।