27 सितंबर 2026 को पर्थ का पंचांग

रविवार, 27 सितंबर 2026, पर्थ, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Perth में है।

रविवार, 27 सितंबर 2026 को पर्थ में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण प्रतिपदा (23:29 तक), नक्षत्र उत्तरा भाद्रपद (13:38 तक) और योग वृद्धि है। सूर्योदय 06:00 पर और सूर्यास्त 18:15 पर है। राहुकाल 16:43 से 18:15 तक है।

दिन और रात
दिन 06:00 – 18:15
रात 05:58 तक
तिथि
प्रतिपदा, 23:29 तक
द्वितीया
नक्षत्र
उत्तरा भाद्रपद, 13:38 तक
रेवती
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

27 सितंबर 2026 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
कृष्ण प्रतिपदा 23:29 तक
कृष्ण द्वितीया 21:44, 28 सित॰ तक
नक्षत्र
रेवती 12:46, 28 सित॰ तक
योग
वृद्धि 13:47 तक
ध्रुव 11:23, 28 सित॰ तक
करण
बालव 12:12 तक
कौलव 23:29 तक
तैतिल 10:39, 28 सित॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:00
सूर्यास्त
18:15
चंद्रोदय
19:00
चंद्रास्त
05:58
दिनमान
12h 16m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:26 – 05:13
अभिजीत मुहूर्त
11:43 – 12:32

अशुभ समय

राहुकाल
16:43 – 18:15
यमगंड
12:07 – 13:39
गुलिक काल
15:11 – 16:43

27 सितंबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग06:00 – 07:31टालें
चर07:31 – 09:03सामान्य
लाभ09:03 – 10:35शुभ
अमृत10:35 – 12:07शुभ
काल12:07 – 13:39टालें
शुभ13:39 – 15:11शुभ
रोग15:11 – 16:43टालें
उद्वेग16:43 – 18:15टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ18:15 – 19:43शुभ
अमृत19:43 – 21:11शुभ
चर21:11 – 22:39सामान्य
रोग22:39 – 00:07टालें
काल00:07 – 01:35टालें
लाभ01:35 – 03:02शुभ
उद्वेग03:02 – 04:30टालें
शुभ04:30 – 05:58शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य06:0007:01दिन
शुक्र07:0108:02दिन
बुध08:0209:03दिन
चंद्र09:0310:05दिन
शनि10:0511:06दिन
गुरु11:0612:07दिन
मंगल12:0713:09दिन
सूर्य13:0914:10दिन
शुक्र14:1015:11दिन
बुध15:1116:13दिन
चंद्र16:1317:14दिन
शनि17:1418:15दिन
गुरु18:1519:14रात
मंगल19:1420:12रात
सूर्य20:1221:11रात
शुक्र21:1122:10रात
बुध22:1023:08रात
चंद्र23:0800:07रात
शनि00:0701:05रात
गुरु01:0502:04रात
मंगल02:0403:02रात
सूर्य03:0204:01रात
शुक्र04:0105:00रात
बुध05:0005:58रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
30 सित॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
4 अक्टू॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
6 अक्टू॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
8 अक्टू॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
10 अक्टू॰ 2026आश्विन अमावस्याअमावस्या
14 अक्टू॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 अक्टू॰ 2026तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
22 अक्टू॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
24 अक्टू॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
26 अक्टू॰ 2026आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां पर्थ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2306° (लाहिड़ी)। समय पर्थ (Australia/Perth) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।