29 सितंबर 2026 को पर्थ का पंचांग

मंगलवार, 29 सितंबर 2026, पर्थ, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Perth में है।

मंगलवार, 29 सितंबर 2026 को पर्थ में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण तृतीया (19:40 तक), नक्षत्र अश्विनी (11:33 तक) और योग व्याघात है। सूर्योदय 05:57 पर और सूर्यास्त 18:17 पर है। राहुकाल 15:12 से 16:44 तक है।

दिन और रात
दिन 05:57 – 18:17
रात 05:56 तक
तिथि
तृतीया, 19:40 तक
चतुर्थी
नक्षत्र
अश्विनी, 11:33 तक
भरणी
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

29 सितंबर 2026 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
कृष्ण तृतीया 19:40 तक
कृष्ण चतुर्थी 17:25, 30 सित॰ तक
नक्षत्र
भरणी 10:06, 30 सित॰ तक
योग
व्याघातअशुभ 08:43 तक
हर्षण 05:50, 30 सित॰ तक
वज्रअशुभ 02:50, 1 अक्टू॰ तक
करण
वणिज 08:44 तक
विष्टि (भद्रा) 19:40 तक
बव 06:34, 30 सित॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:57
सूर्यास्त
18:17
चंद्रोदय
21:15
चंद्रास्त
07:03
दिनमान
12h 20m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:23 – 05:10
अभिजीत मुहूर्त
11:42 – 12:31

अशुभ समय

राहुकाल
15:12 – 16:44
यमगंड
09:02 – 10:34
गुलिक काल
12:07 – 13:39

29 सितंबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग05:57 – 07:29टालें
उद्वेग07:29 – 09:02टालें
चर09:02 – 10:34सामान्य
लाभ10:34 – 12:07शुभ
अमृत12:07 – 13:39शुभ
काल13:39 – 15:12टालें
शुभ15:12 – 16:44शुभ
रोग16:44 – 18:17टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल18:17 – 19:44टालें
लाभ19:44 – 21:11शुभ
उद्वेग21:11 – 22:39टालें
शुभ22:39 – 00:06शुभ
अमृत00:06 – 01:33शुभ
चर01:33 – 03:01सामान्य
रोग03:01 – 04:28टालें
काल04:28 – 05:56टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल05:5706:59दिन
सूर्य06:5908:00दिन
शुक्र08:0009:02दिन
बुध09:0210:03दिन
चंद्र10:0311:05दिन
शनि11:0512:07दिन
गुरु12:0713:08दिन
मंगल13:0814:10दिन
सूर्य14:1015:12दिन
शुक्र15:1216:13दिन
बुध16:1317:15दिन
चंद्र17:1518:17दिन
शनि18:1719:15रात
गुरु19:1520:13रात
मंगल20:1321:11रात
सूर्य21:1122:10रात
शुक्र22:1023:08रात
बुध23:0800:06रात
चंद्र00:0601:04रात
शनि01:0402:03रात
गुरु02:0303:01रात
मंगल03:0103:59रात
सूर्य03:5904:57रात
शुक्र04:5705:56रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
30 सित॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
4 अक्टू॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
6 अक्टू॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
8 अक्टू॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
10 अक्टू॰ 2026आश्विन अमावस्याअमावस्या
14 अक्टू॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 अक्टू॰ 2026तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
22 अक्टू॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
24 अक्टू॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
26 अक्टू॰ 2026आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां पर्थ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2306° (लाहिड़ी)। समय पर्थ (Australia/Perth) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।