28 दिसंबर 2026 को पर्थ का पंचांग

सोमवार, 28 दिसंबर 2026, पर्थ, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Perth में है।

सोमवार, 28 दिसंबर 2026 को पर्थ में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण पंचमी (17:28 तक), नक्षत्र मघा (19:03 तक) और योग प्रीति है। सूर्योदय 05:10 पर और सूर्यास्त 19:24 पर है। राहुकाल 06:57 से 08:44 तक है।

दिन और रात
दिन 05:10 – 19:24
रात 05:11 तक
तिथि
पंचमी, 17:28 तक
षष्ठी
नक्षत्र
मघा, 19:03 तक
पूर्वा फाल्गुनी
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

28 दिसंबर 2026 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
कृष्ण पंचमी 17:28 तक
कृष्ण षष्ठी 15:55, 29 दिस॰ तक
नक्षत्र
मघा 19:03 तक
पूर्वा फाल्गुनी 18:13, 29 दिस॰ तक
योग
प्रीति 20:25 तक
आयुष्मान 18:00, 29 दिस॰ तक
करण
कौलव 06:31 तक
तैतिल 17:28 तक
गर 04:36, 29 दिस॰ तक
वणिज 15:55, 29 दिस॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिधनु
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:10
सूर्यास्त
19:24
चंद्रोदय
22:47
चंद्रास्त
09:39
दिनमान
14h 14m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:52 – 04:31
अभिजीत मुहूर्त
11:49 – 12:46

अशुभ समय

राहुकाल
06:57 – 08:44
यमगंड
10:31 – 12:17
गुलिक काल
14:04 – 15:51

28 दिसंबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत05:10 – 06:57शुभ
काल06:57 – 08:44टालें
शुभ08:44 – 10:31शुभ
रोग10:31 – 12:17टालें
उद्वेग12:17 – 14:04टालें
चर14:04 – 15:51सामान्य
लाभ15:51 – 17:38शुभ
अमृत17:38 – 19:24शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर19:24 – 20:38सामान्य
रोग20:38 – 21:51टालें
काल21:51 – 23:04टालें
लाभ23:04 – 00:18शुभ
उद्वेग00:18 – 01:31टालें
शुभ01:31 – 02:44शुभ
अमृत02:44 – 03:58शुभ
चर03:58 – 05:11सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र05:1006:22दिन
शनि06:2207:33दिन
गुरु07:3308:44दिन
मंगल08:4409:55दिन
सूर्य09:5511:06दिन
शुक्र11:0612:17दिन
बुध12:1713:29दिन
चंद्र13:2914:40दिन
शनि14:4015:51दिन
गुरु15:5117:02दिन
मंगल17:0218:13दिन
सूर्य18:1319:24दिन
शुक्र19:2420:13रात
बुध20:1321:02रात
चंद्र21:0221:51रात
शनि21:5122:40रात
गुरु22:4023:29रात
मंगल23:2900:18रात
सूर्य00:1801:07रात
शुक्र01:0701:56रात
बुध01:5602:44रात
चंद्र02:4403:33रात
शनि03:3304:22रात
गुरु04:2205:11रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
31 दिस॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
3 जन॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
5 जन॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
7 जन॰ 2027पौष अमावस्याअमावस्या
12 जन॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
14 जन॰ 2027मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
19 जन॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
20 जन॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
22 जन॰ 2027पौष पूर्णिमापूर्णिमा
26 जन॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां पर्थ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2341° (लाहिड़ी)। समय पर्थ (Australia/Perth) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।