10 जनवरी 2027 को पर्थ का पंचांग

रविवार, 10 जनवरी 2027, पर्थ, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Perth में है।

रविवार, 10 जनवरी 2027 को पर्थ में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल द्वितीया (09:37 तक), नक्षत्र श्रवण (17:42 तक) और योग वज्र है। सूर्योदय 05:20 पर और सूर्यास्त 19:26 पर है। राहुकाल 17:40 से 19:26 तक है।

दिन और रात
दिन 05:20 – 19:26
रात 05:21 तक
तिथि
द्वितीया, 09:37 तक
तृतीया
नक्षत्र
श्रवण, 17:42 तक
धनिष्ठा
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

10 जनवरी 2027 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
शुक्ल द्वितीया 09:37 तक
शुक्ल तृतीया 11:58, 11 जन॰ तक
नक्षत्र
श्रवण 17:42 तक
धनिष्ठा 20:23, 11 जन॰ तक
योग
वज्रअशुभ 19:32 तक
सिद्धि 20:08, 11 जन॰ तक
करण
कौलव 09:37 तक
तैतिल 22:50 तक
गर 11:58, 11 जन॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिधनु
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:20
सूर्यास्त
19:26
चंद्रोदय
07:13
चंद्रास्त
21:02
दिनमान
14h 6m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:01 – 04:41
अभिजीत मुहूर्त
11:55 – 12:51

अशुभ समय

राहुकाल
17:40 – 19:26
यमगंड
12:23 – 14:09
गुलिक काल
15:55 – 17:40

10 जनवरी 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग05:20 – 07:06टालें
चर07:06 – 08:52सामान्य
लाभ08:52 – 10:37शुभ
अमृत10:37 – 12:23शुभ
काल12:23 – 14:09टालें
शुभ14:09 – 15:55शुभ
रोग15:55 – 17:40टालें
उद्वेग17:40 – 19:26टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ19:26 – 20:40शुभ
अमृत20:40 – 21:55शुभ
चर21:55 – 23:09सामान्य
रोग23:09 – 00:24टालें
काल00:24 – 01:38टालें
लाभ01:38 – 02:52शुभ
उद्वेग02:52 – 04:07टालें
शुभ04:07 – 05:21शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य05:2006:31दिन
शुक्र06:3107:41दिन
बुध07:4108:52दिन
चंद्र08:5210:02दिन
शनि10:0211:13दिन
गुरु11:1312:23दिन
मंगल12:2313:34दिन
सूर्य13:3414:44दिन
शुक्र14:4415:55दिन
बुध15:5517:05दिन
चंद्र17:0518:16दिन
शनि18:1619:26दिन
गुरु19:2620:16रात
मंगल20:1621:05रात
सूर्य21:0521:55रात
शुक्र21:5522:44रात
बुध22:4423:34रात
चंद्र23:3400:24रात
शनि00:2401:13रात
गुरु01:1302:03रात
मंगल02:0302:52रात
सूर्य02:5203:42रात
शुक्र03:4204:32रात
बुध04:3205:21रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
12 जन॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
14 जन॰ 2027मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
19 जन॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
20 जन॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
22 जन॰ 2027पौष पूर्णिमापूर्णिमा
26 जन॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
30 जन॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
2 फ़र॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
4 फ़र॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
6 फ़र॰ 2027माघ अमावस्याअमावस्या

तिथियां पर्थ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2346° (लाहिड़ी)। समय पर्थ (Australia/Perth) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।