21 मार्च 2027 को पर्थ का पंचांग

रविवार, 21 मार्च 2027, पर्थ, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Perth में है।

रविवार, 21 मार्च 2027 को पर्थ में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल चतुर्दशी (20:52 तक), नक्षत्र पूर्वा फाल्गुनी (00:37, 22 मार्च तक) और योग शूल है। सूर्योदय 06:20 पर और सूर्यास्त 18:27 पर है। राहुकाल 16:56 से 18:27 तक है।

दिन और रात
दिन 06:20 – 18:27
रात 06:20 तक
तिथि
चतुर्दशी, 20:52 तक
पूर्णिमा
नक्षत्र
पूर्वा फाल्गुनी, 00:37 तक
उत्तरा फाल्गुनी
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

21 मार्च 2027 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
शुक्ल चतुर्दशी 20:52 तक
पूर्णिमा 18:43, 22 मार्च तक
नक्षत्र
पूर्वा फाल्गुनी 00:37, 22 मार्च तक
उत्तरा फाल्गुनी 23:16, 22 मार्च तक
योग
शूलअशुभ 19:28 तक
गंडअशुभ 16:34, 22 मार्च तक
करण
गर 10:02 तक
वणिज 20:52 तक
विष्टि (भद्रा) 07:45, 22 मार्च तक
चंद्र राशि
सिंह 06:14, 22 मार्च तक
सूर्य राशिमीन
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:20
सूर्यास्त
18:27
चंद्रोदय
17:37
चंद्रास्त
04:46
दिनमान
12h 7m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
फाल्गुन
मास (पूर्णिमांत)
फाल्गुन
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:45 – 05:32
अभिजीत मुहूर्त
11:59 – 12:47

अशुभ समय

राहुकाल
16:56 – 18:27
यमगंड
12:23 – 13:54
गुलिक काल
15:25 – 16:56

21 मार्च 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग06:20 – 07:50टालें
चर07:50 – 09:21सामान्य
लाभ09:21 – 10:52शुभ
अमृत10:52 – 12:23शुभ
काल12:23 – 13:54टालें
शुभ13:54 – 15:25शुभ
रोग15:25 – 16:56टालें
उद्वेग16:56 – 18:27टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ18:27 – 19:56शुभ
अमृत19:56 – 21:25शुभ
चर21:25 – 22:54सामान्य
रोग22:54 – 00:23टालें
काल00:23 – 01:53टालें
लाभ01:53 – 03:22शुभ
उद्वेग03:22 – 04:51टालें
शुभ04:51 – 06:20शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य06:2007:20दिन
शुक्र07:2008:21दिन
बुध08:2109:21दिन
चंद्र09:2110:22दिन
शनि10:2211:23दिन
गुरु11:2312:23दिन
मंगल12:2313:24दिन
सूर्य13:2414:24दिन
शुक्र14:2415:25दिन
बुध15:2516:25दिन
चंद्र16:2517:26दिन
शनि17:2618:27दिन
गुरु18:2719:26रात
मंगल19:2620:26रात
सूर्य20:2621:25रात
शुक्र21:2522:25रात
बुध22:2523:24रात
चंद्र23:2400:23रात
शनि00:2301:23रात
गुरु01:2302:22रात
मंगल02:2203:22रात
सूर्य03:2204:21रात
शुक्र04:2105:21रात
बुध05:2106:20रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
22 मार्च 2027फाल्गुन पूर्णिमापूर्णिमा
26 मार्च 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
30 मार्च 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
2 अप्रैल 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
5 अप्रैल 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
7 अप्रैल 2027चैत्र अमावस्याअमावस्या
10 अप्रैल 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
14 अप्रैल 2027मेष संक्रांतिसूर्य का मेष में प्रवेश
17 अप्रैल 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
19 अप्रैल 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी

तिथियां पर्थ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2372° (लाहिड़ी)। समय पर्थ (Australia/Perth) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।