22 मार्च 2027 को पर्थ का पंचांग

सोमवार, 22 मार्च 2027, पर्थ, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Perth में है।

सोमवार, 22 मार्च 2027 को पर्थ में सूर्योदय के समय तिथि पूर्णिमा (18:43 तक), नक्षत्र उत्तरा फाल्गुनी (23:16 तक) और योग गंड है। सूर्योदय 06:20 पर और सूर्यास्त 18:25 पर है। राहुकाल 07:51 से 09:22 तक है।

दिन और रात
दिन 06:20 – 18:25
रात 06:21 तक
तिथि
पूर्णिमा, 18:43 तक
प्रतिपदा
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी, 23:16 तक
हस्त
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

22 मार्च 2027 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
पूर्णिमा 18:43 तक
कृष्ण प्रतिपदा 16:58, 23 मार्च तक
नक्षत्र
हस्त 22:19, 23 मार्च तक
योग
गंडअशुभ 16:34 तक
वृद्धि 13:57, 23 मार्च तक
करण
विष्टि (भद्रा) 07:45 तक
बव 18:43 तक
बालव 05:47, 23 मार्च तक
कौलव 16:58, 23 मार्च तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमीन
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:20
सूर्यास्त
18:25
चंद्रोदय
18:08
चंद्रास्त
05:53
दिनमान
12h 5m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
फाल्गुन
मास (पूर्णिमांत)
फाल्गुन
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:45 – 05:33
अभिजीत मुहूर्त
11:59 – 12:47

अशुभ समय

राहुकाल
07:51 – 09:22
यमगंड
10:52 – 12:23
गुलिक काल
13:53 – 15:24

22 मार्च 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत06:20 – 07:51शुभ
काल07:51 – 09:22टालें
शुभ09:22 – 10:52शुभ
रोग10:52 – 12:23टालें
उद्वेग12:23 – 13:53टालें
चर13:53 – 15:24सामान्य
लाभ15:24 – 16:55शुभ
अमृत16:55 – 18:25शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर18:25 – 19:55सामान्य
रोग19:55 – 21:24टालें
काल21:24 – 22:54टालें
लाभ22:54 – 00:23शुभ
उद्वेग00:23 – 01:53टालें
शुभ01:53 – 03:22शुभ
अमृत03:22 – 04:52शुभ
चर04:52 – 06:21सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र06:2007:21दिन
शनि07:2108:21दिन
गुरु08:2109:22दिन
मंगल09:2210:22दिन
सूर्य10:2211:22दिन
शुक्र11:2212:23दिन
बुध12:2313:23दिन
चंद्र13:2314:24दिन
शनि14:2415:24दिन
गुरु15:2416:25दिन
मंगल16:2517:25दिन
सूर्य17:2518:25दिन
शुक्र18:2519:25रात
बुध19:2520:25रात
चंद्र20:2521:24रात
शनि21:2422:24रात
गुरु22:2423:24रात
मंगल23:2400:23रात
सूर्य00:2301:23रात
शुक्र01:2302:22रात
बुध02:2203:22रात
चंद्र03:2204:22रात
शनि04:2205:21रात
गुरु05:2106:21रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
22 मार्च 2027फाल्गुन पूर्णिमापूर्णिमा
26 मार्च 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
30 मार्च 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
2 अप्रैल 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
5 अप्रैल 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
7 अप्रैल 2027चैत्र अमावस्याअमावस्या
10 अप्रैल 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
14 अप्रैल 2027मेष संक्रांतिसूर्य का मेष में प्रवेश
17 अप्रैल 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
19 अप्रैल 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
20 अप्रैल 2027चैत्र पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां पर्थ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2373° (लाहिड़ी)। समय पर्थ (Australia/Perth) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।