25 सितंबर 2027 को पर्थ का पंचांग

शनिवार, 25 सितंबर 2027, पर्थ, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Perth में है।

शनिवार, 25 सितंबर 2027 को पर्थ में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण दशमी (01:01, 26 सित॰ तक), नक्षत्र पुनर्वसु (16:57 तक) और योग परिघ है। सूर्योदय 06:02 पर और सूर्यास्त 18:14 पर है। राहुकाल 09:05 से 10:37 तक है।

दिन और रात
दिन 06:02 – 18:14
रात 06:01 तक
तिथि
दशमी, 01:01 तक
एकादशी
नक्षत्र
पुनर्वसु, 16:57 तक
पुष्य
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

25 सितंबर 2027 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
कृष्ण दशमी 01:01, 26 सित॰ तक
कृष्ण एकादशी 22:19, 26 सित॰ तक
नक्षत्र
पुष्य 15:08, 26 सित॰ तक
योग
परिघअशुभ 20:21 तक
शिव 17:05, 26 सित॰ तक
करण
वणिज 14:15 तक
विष्टि (भद्रा) 01:01, 26 सित॰ तक
बव 11:42, 26 सित॰ तक
चंद्र राशि
मिथुन 11:22 तक
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:02
सूर्यास्त
18:14
चंद्रोदय
02:31
चंद्रास्त
12:50
दिनमान
12h 11m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:28 – 05:15
अभिजीत मुहूर्त
11:44 – 12:33

अशुभ समय

राहुकाल
09:05 – 10:37
यमगंड
13:40 – 15:11
गुलिक काल
06:02 – 07:34

25 सितंबर 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल06:02 – 07:34टालें
शुभ07:34 – 09:05शुभ
रोग09:05 – 10:37टालें
उद्वेग10:37 – 12:08टालें
चर12:08 – 13:40सामान्य
लाभ13:40 – 15:11शुभ
अमृत15:11 – 16:42शुभ
काल16:42 – 18:14टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ18:14 – 19:42शुभ
उद्वेग19:42 – 21:11टालें
शुभ21:11 – 22:39शुभ
अमृत22:39 – 00:07शुभ
चर00:07 – 01:36सामान्य
रोग01:36 – 03:04टालें
काल03:04 – 04:33टालें
लाभ04:33 – 06:01शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि06:0207:03दिन
गुरु07:0308:04दिन
मंगल08:0409:05दिन
सूर्य09:0510:06दिन
शुक्र10:0611:07दिन
बुध11:0712:08दिन
चंद्र12:0813:09दिन
शनि13:0914:10दिन
गुरु14:1015:11दिन
मंगल15:1116:12दिन
सूर्य16:1217:13दिन
शुक्र17:1318:14दिन
बुध18:1419:13रात
चंद्र19:1320:12रात
शनि20:1221:11रात
गुरु21:1122:10रात
मंगल22:1023:09रात
सूर्य23:0900:07रात
शुक्र00:0701:06रात
बुध01:0602:05रात
चंद्र02:0503:04रात
शनि03:0404:03रात
गुरु04:0305:02रात
मंगल05:0206:01रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
26 सित॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
28 सित॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
30 सित॰ 2027आश्विन अमावस्याअमावस्या
3 अक्टू॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
11 अक्टू॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
13 अक्टू॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
15 अक्टू॰ 2027आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
18 अक्टू॰ 2027तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
19 अक्टू॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
23 अक्टू॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां पर्थ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2444° (लाहिड़ी)। समय पर्थ (Australia/Perth) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।