12 नवंबर 2027 को पर्थ का पंचांग

शुक्रवार, 12 नवंबर 2027, पर्थ, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Perth में है।

शुक्रवार, 12 नवंबर 2027 को पर्थ में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल त्रयोदशी (12:51 तक), नक्षत्र रेवती (10:25 तक) और योग सिद्धि है। सूर्योदय 05:10 पर और सूर्यास्त 18:50 पर है। राहुकाल 10:18 से 12:00 तक है।

दिन और रात
दिन 05:10 – 18:50
रात 05:10 तक
तिथि
त्रयोदशी, 12:51 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
रेवती, 10:25 तक
अश्विनी
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

12 नवंबर 2027 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
शुक्ल त्रयोदशी 12:51 तक
शुक्ल चतुर्दशी 12:25, 13 नव॰ तक
नक्षत्र
रेवती 10:25 तक
अश्विनी 10:40, 13 नव॰ तक
योग
सिद्धि 00:12, 13 नव॰ तक
व्यतीपातअशुभ 22:28, 13 नव॰ तक
करण
तैतिल 12:51 तक
गर 00:43, 13 नव॰ तक
वणिज 12:25, 13 नव॰ तक
चंद्र राशि
मीन 10:25 तक
सूर्य राशितुला
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:10
सूर्यास्त
18:50
चंद्रोदय
17:07
चंद्रास्त
03:29
दिनमान
13h 40m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:48 – 04:29
अभिजीत मुहूर्त
11:33 – 12:28

अशुभ समय

राहुकाल
10:18 – 12:00
यमगंड
15:25 – 17:08
गुलिक काल
06:53 – 08:35

12 नवंबर 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर05:10 – 06:53सामान्य
लाभ06:53 – 08:35शुभ
अमृत08:35 – 10:18शुभ
काल10:18 – 12:00टालें
शुभ12:00 – 13:43शुभ
रोग13:43 – 15:25टालें
उद्वेग15:25 – 17:08टालें
चर17:08 – 18:50सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग18:50 – 20:08टालें
काल20:08 – 21:25टालें
लाभ21:25 – 22:43शुभ
उद्वेग22:43 – 00:00टालें
शुभ00:00 – 01:17शुभ
अमृत01:17 – 02:35शुभ
चर02:35 – 03:52सामान्य
रोग03:52 – 05:10टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र05:1006:19दिन
बुध06:1907:27दिन
चंद्र07:2708:35दिन
शनि08:3509:44दिन
गुरु09:4410:52दिन
मंगल10:5212:00दिन
सूर्य12:0013:09दिन
शुक्र13:0914:17दिन
बुध14:1715:25दिन
चंद्र15:2516:34दिन
शनि16:3417:42दिन
गुरु17:4218:50दिन
मंगल18:5019:42रात
सूर्य19:4220:34रात
शुक्र20:3421:25रात
बुध21:2522:17रात
चंद्र22:1723:08रात
शनि23:0800:00रात
गुरु00:0000:52रात
मंगल00:5201:43रात
सूर्य01:4302:35रात
शुक्र02:3503:27रात
बुध03:2704:18रात
चंद्र04:1805:10रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
12 नव॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
14 नव॰ 2027कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
17 नव॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
17 नव॰ 2027वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
21 नव॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
24 नव॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
26 नव॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
28 नव॰ 2027मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
2 दिस॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
10 दिस॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
11 दिस॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी

तिथियां पर्थ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2463° (लाहिड़ी)। समय पर्थ (Australia/Perth) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।