17 नवंबर 2027 को पर्थ का पंचांग

बुधवार, 17 नवंबर 2027, पर्थ, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Perth में है।

बुधवार, 17 नवंबर 2027 को पर्थ में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण तृतीया (06:12 तक), नक्षत्र मृगशिरा (07:12 तक) और योग सिद्ध है। सूर्योदय 05:07 पर और सूर्यास्त 18:55 पर है। राहुकाल 12:01 से 13:45 तक है।

दिन और रात
दिन 05:07 – 18:55
रात 05:07 तक
तिथि
चतुर्थी, 04:05 तक
पंचमी
नक्षत्र
आर्द्रा
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

17 नवंबर 2027 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण तृतीया 06:12 तक
कृष्ण चतुर्थी 04:05, 18 नव॰ तक
कृष्ण पंचमी 01:57, 19 नव॰ तक
नक्षत्र
आर्द्रा 05:48, 18 नव॰ तक
योग
सिद्ध 12:18 तक
साध्य 09:23, 18 नव॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 06:12 तक
बव 17:09 तक
बालव 04:05, 18 नव॰ तक
कौलव 15:01, 18 नव॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:07
सूर्यास्त
18:55
चंद्रोदय
22:23
चंद्रास्त
07:25
दिनमान
13h 47m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:46 – 04:27
अभिजीत मुहूर्त
11:34 – 12:29 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:01 – 13:45
यमगंड
06:51 – 08:34
गुलिक काल
10:18 – 12:01

17 नवंबर 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:07 – 06:51शुभ
अमृत06:51 – 08:34शुभ
काल08:34 – 10:18टालें
शुभ10:18 – 12:01शुभ
रोग12:01 – 13:45टालें
उद्वेग13:45 – 15:28टालें
चर15:28 – 17:11सामान्य
लाभ17:11 – 18:55शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग18:55 – 20:11टालें
शुभ20:11 – 21:28शुभ
अमृत21:28 – 22:44शुभ
चर22:44 – 00:01सामान्य
रोग00:01 – 01:17टालें
काल01:17 – 02:34टालें
लाभ02:34 – 03:50शुभ
उद्वेग03:50 – 05:07टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:0706:16दिन
चंद्र06:1607:25दिन
शनि07:2508:34दिन
गुरु08:3409:43दिन
मंगल09:4310:52दिन
सूर्य10:5212:01दिन
शुक्र12:0113:10दिन
बुध13:1014:19दिन
चंद्र14:1915:28दिन
शनि15:2816:37दिन
गुरु16:3717:46दिन
मंगल17:4618:55दिन
सूर्य18:5519:46रात
शुक्र19:4620:37रात
बुध20:3721:28रात
चंद्र21:2822:19रात
शनि22:1923:10रात
गुरु23:1000:01रात
मंगल00:0100:52रात
सूर्य00:5201:43रात
शुक्र01:4302:34रात
बुध02:3403:25रात
चंद्र03:2504:16रात
शनि04:1605:07रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
17 नव॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
17 नव॰ 2027वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
21 नव॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
24 नव॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
26 नव॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
28 नव॰ 2027मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
2 दिस॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
10 दिस॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
11 दिस॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
13 दिस॰ 2027मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा
16 दिस॰ 2027धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश

तिथियां पर्थ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2465° (लाहिड़ी)। समय पर्थ (Australia/Perth) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।