29 दिसंबर 2027 को पर्थ का पंचांग

बुधवार, 29 दिसंबर 2027, पर्थ, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Perth में है।

बुधवार, 29 दिसंबर 2027 को पर्थ में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल प्रतिपदा (05:58 तक), नक्षत्र पूर्वाषाढ़ा (09:55 तक) और योग ध्रुव है। सूर्योदय 05:11 पर और सूर्यास्त 19:24 पर है। राहुकाल 12:18 से 14:04 तक है।

दिन और रात
दिन 05:11 – 19:24
रात 05:12 तक
तिथि
द्वितीया
नक्षत्र
पूर्वाषाढ़ा, 09:55 तक
उत्तराषाढ़ा
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

29 दिसंबर 2027 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
शुक्ल प्रतिपदा 05:58 तक
शुक्ल द्वितीया 08:10, 30 दिस॰ तक
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा 12:37, 30 दिस॰ तक
योग
ध्रुव 10:48 तक
व्याघातअशुभ 11:24, 30 दिस॰ तक
करण
बव 05:58 तक
बालव 19:01 तक
कौलव 08:10, 30 दिस॰ तक
चंद्र राशि
धनु 16:33 तक
सूर्य राशिधनु
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:11
सूर्यास्त
19:24
चंद्रोदय
06:09
चंद्रास्त
20:35
दिनमान
14h 13m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:53 – 04:32
अभिजीत मुहूर्त
11:49 – 12:46 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:18 – 14:04
यमगंड
06:58 – 08:44
गुलिक काल
10:31 – 12:18

29 दिसंबर 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:11 – 06:58शुभ
अमृत06:58 – 08:44शुभ
काल08:44 – 10:31टालें
शुभ10:31 – 12:18शुभ
रोग12:18 – 14:04टालें
उद्वेग14:04 – 15:51टालें
चर15:51 – 17:38सामान्य
लाभ17:38 – 19:24शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग19:24 – 20:38टालें
शुभ20:38 – 21:51शुभ
अमृत21:51 – 23:05शुभ
चर23:05 – 00:18सामान्य
रोग00:18 – 01:31टालें
काल01:31 – 02:45टालें
लाभ02:45 – 03:58शुभ
उद्वेग03:58 – 05:12टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:1106:22दिन
चंद्र06:2207:33दिन
शनि07:3308:44दिन
गुरु08:4409:55दिन
मंगल09:5511:07दिन
सूर्य11:0712:18दिन
शुक्र12:1813:29दिन
बुध13:2914:40दिन
चंद्र14:4015:51दिन
शनि15:5117:02दिन
गुरु17:0218:13दिन
मंगल18:1319:24दिन
सूर्य19:2420:13रात
शुक्र20:1321:02रात
बुध21:0221:51रात
चंद्र21:5122:40रात
शनि22:4023:29रात
गुरु23:2900:18रात
मंगल00:1801:07रात
सूर्य01:0701:56रात
शुक्र01:5602:45रात
बुध02:4503:34रात
चंद्र03:3404:23रात
शनि04:2305:12रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
1 जन॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
8 जन॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
10 जन॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
12 जन॰ 2028पौष पूर्णिमापूर्णिमा
15 जन॰ 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
15 जन॰ 2028मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
19 जन॰ 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
22 जन॰ 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
24 जन॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
26 जन॰ 2028माघ अमावस्याअमावस्या

तिथियां पर्थ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2481° (लाहिड़ी)। समय पर्थ (Australia/Perth) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।