27 जनवरी 2028 को पर्थ का पंचांग

गुरुवार, 27 जनवरी 2028, पर्थ, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Perth में है।

गुरुवार, 27 जनवरी 2028 को पर्थ में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल प्रतिपदा (01:49, 28 जन॰ तक), नक्षत्र श्रवण (22:19 तक) और योग सिद्धि है। सूर्योदय 05:36 पर और सूर्यास्त 19:21 पर है। राहुकाल 14:12 से 15:55 तक है।

दिन और रात
दिन 05:36 – 19:21
रात 05:37 तक
तिथि
प्रतिपदा, 01:49 तक
द्वितीया
नक्षत्र
श्रवण, 22:19 तक
धनिष्ठा
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

27 जनवरी 2028 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
शुक्ल प्रतिपदा 01:49, 28 जन॰ तक
शुक्ल द्वितीया 04:32, 29 जन॰ तक
नक्षत्र
श्रवण 22:19 तक
धनिष्ठा 01:26, 29 जन॰ तक
योग
सिद्धि 16:52 तक
व्यतीपातअशुभ 17:50, 28 जन॰ तक
करण
किंस्तुघ्न 12:29 तक
बव 01:49, 28 जन॰ तक
बालव 15:10, 28 जन॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमकर
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:36
सूर्यास्त
19:21
चंद्रोदय
05:56
चंद्रास्त
19:42
दिनमान
13h 45m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:14 – 04:55
अभिजीत मुहूर्त
12:01 – 12:56

अशुभ समय

राहुकाल
14:12 – 15:55
यमगंड
05:36 – 07:19
गुलिक काल
09:02 – 10:45

27 जनवरी 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ05:36 – 07:19शुभ
रोग07:19 – 09:02टालें
उद्वेग09:02 – 10:45टालें
चर10:45 – 12:28सामान्य
लाभ12:28 – 14:12शुभ
अमृत14:12 – 15:55शुभ
काल15:55 – 17:38टालें
शुभ17:38 – 19:21शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत19:21 – 20:38शुभ
चर20:38 – 21:55सामान्य
रोग21:55 – 23:12टालें
काल23:12 – 00:29टालें
लाभ00:29 – 01:46शुभ
उद्वेग01:46 – 03:03टालें
शुभ03:03 – 04:20शुभ
अमृत04:20 – 05:37शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु05:3606:44दिन
मंगल06:4407:53दिन
सूर्य07:5309:02दिन
शुक्र09:0210:11दिन
बुध10:1111:20दिन
चंद्र11:2012:28दिन
शनि12:2813:37दिन
गुरु13:3714:46दिन
मंगल14:4615:55दिन
सूर्य15:5517:04दिन
शुक्र17:0418:12दिन
बुध18:1219:21दिन
चंद्र19:2120:12रात
शनि20:1221:04रात
गुरु21:0421:55रात
मंगल21:5522:46रात
सूर्य22:4623:38रात
शुक्र23:3800:29रात
बुध00:2901:20रात
चंद्र01:2002:11रात
शनि02:1103:03रात
गुरु03:0303:54रात
मंगल03:5404:45रात
सूर्य04:4505:37रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
31 जन॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
7 फ़र॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
9 फ़र॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
10 फ़र॰ 2028माघ पूर्णिमापूर्णिमा
13 फ़र॰ 2028कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
14 फ़र॰ 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
17 फ़र॰ 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
21 फ़र॰ 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
23 फ़र॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
25 फ़र॰ 2028फाल्गुन अमावस्याअमावस्या

तिथियां पर्थ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2492° (लाहिड़ी)। समय पर्थ (Australia/Perth) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।