5 मार्च 2028 को पर्थ का पंचांग

रविवार, 5 मार्च 2028, पर्थ, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Perth में है।

रविवार, 5 मार्च 2028 को पर्थ में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल नवमी (03:25, 6 मार्च तक), नक्षत्र मृगशिरा (22:30 तक) और योग प्रीति है। सूर्योदय 06:09 पर और सूर्यास्त 18:46 पर है। राहुकाल 17:11 से 18:46 तक है।

दिन और रात
दिन 06:09 – 18:46
रात 06:09 तक
तिथि
नवमी, 03:25 तक
दशमी
नक्षत्र
मृगशिरा, 22:30 तक
आर्द्रा
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

5 मार्च 2028 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
शुक्ल नवमी 03:25, 6 मार्च तक
शुक्ल दशमी 01:31, 7 मार्च तक
नक्षत्र
आर्द्रा 21:25, 6 मार्च तक
योग
प्रीति 20:24 तक
आयुष्मान 17:51, 6 मार्च तक
करण
बालव 16:08 तक
कौलव 03:25, 6 मार्च तक
तैतिल 14:33, 6 मार्च तक
चंद्र राशि
वृषभ 10:48 तक
सूर्य राशिकुंभ
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:09
सूर्यास्त
18:46
चंद्रोदय
14:18
चंद्रास्त
इस दिन चंद्रास्त नहीं
दिनमान
12h 37m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
फाल्गुन
मास (पूर्णिमांत)
फाल्गुन
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:38 – 05:23
अभिजीत मुहूर्त
12:02 – 12:52

अशुभ समय

राहुकाल
17:11 – 18:46
यमगंड
12:27 – 14:02
गुलिक काल
15:37 – 17:11

5 मार्च 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग06:09 – 07:43टालें
चर07:43 – 09:18सामान्य
लाभ09:18 – 10:53शुभ
अमृत10:53 – 12:27शुभ
काल12:27 – 14:02टालें
शुभ14:02 – 15:37शुभ
रोग15:37 – 17:11टालें
उद्वेग17:11 – 18:46टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ18:46 – 20:11शुभ
अमृत20:11 – 21:37शुभ
चर21:37 – 23:02सामान्य
रोग23:02 – 00:28टालें
काल00:28 – 01:53टालें
लाभ01:53 – 03:18शुभ
उद्वेग03:18 – 04:44टालें
शुभ04:44 – 06:09शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य06:0907:12दिन
शुक्र07:1208:15दिन
बुध08:1509:18दिन
चंद्र09:1810:21दिन
शनि10:2111:24दिन
गुरु11:2412:27दिन
मंगल12:2713:30दिन
सूर्य13:3014:33दिन
शुक्र14:3315:37दिन
बुध15:3716:40दिन
चंद्र16:4017:43दिन
शनि17:4318:46दिन
गुरु18:4619:43रात
मंगल19:4320:40रात
सूर्य20:4021:37रात
शुक्र21:3722:34रात
बुध22:3423:31रात
चंद्र23:3100:28रात
शनि00:2801:25रात
गुरु01:2502:22रात
मंगल02:2203:18रात
सूर्य03:1804:15रात
शुक्र04:1505:12रात
बुध05:1206:09रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
7 मार्च 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
9 मार्च 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
11 मार्च 2028फाल्गुन पूर्णिमापूर्णिमा
14 मार्च 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
14 मार्च 2028मीन संक्रांतिसूर्य का मीन में प्रवेश
18 मार्च 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
21 मार्च 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
23 मार्च 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
26 मार्च 2028चैत्र अमावस्याअमावस्या
30 मार्च 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां पर्थ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2506° (लाहिड़ी)। समय पर्थ (Australia/Perth) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।