6 सितंबर 2028 को पर्थ का पंचांग

बुधवार, 6 सितंबर 2028, पर्थ, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Perth में है।

बुधवार, 6 सितंबर 2028 को पर्थ में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण द्वितीया (12:39 तक), नक्षत्र उत्तरा भाद्रपद (18:19 तक) और योग गंड है। सूर्योदय 06:26 पर और सूर्यास्त 18:03 पर है। राहुकाल 12:15 से 13:42 तक है।

दिन और रात
दिन 06:26 – 18:03
रात 06:25 तक
तिथि
द्वितीया, 12:39 तक
तृतीया
नक्षत्र
उत्तरा भाद्रपद, 18:19 तक
रेवती
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

6 सितंबर 2028 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण द्वितीया 12:39 तक
कृष्ण तृतीया 14:56, 7 सित॰ तक
नक्षत्र
रेवती 21:06, 7 सित॰ तक
योग
गंडअशुभ 06:34, 7 सित॰ तक
करण
गर 12:39 तक
वणिज 01:49, 7 सित॰ तक
विष्टि (भद्रा) 14:56, 7 सित॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिसिंह
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:26
सूर्यास्त
18:03
चंद्रोदय
20:11
चंद्रास्त
07:09
दिनमान
11h 36m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:47 – 05:37
अभिजीत मुहूर्त
11:51 – 12:38 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:15 – 13:42
यमगंड
07:53 – 09:20
गुलिक काल
10:48 – 12:15

6 सितंबर 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ06:26 – 07:53शुभ
अमृत07:53 – 09:20शुभ
काल09:20 – 10:48टालें
शुभ10:48 – 12:15शुभ
रोग12:15 – 13:42टालें
उद्वेग13:42 – 15:09टालें
चर15:09 – 16:36सामान्य
लाभ16:36 – 18:03शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग18:03 – 19:36टालें
शुभ19:36 – 21:08शुभ
अमृत21:08 – 22:41शुभ
चर22:41 – 00:14सामान्य
रोग00:14 – 01:47टालें
काल01:47 – 03:20टालें
लाभ03:20 – 04:52शुभ
उद्वेग04:52 – 06:25टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध06:2607:24दिन
चंद्र07:2408:22दिन
शनि08:2209:20दिन
गुरु09:2010:19दिन
मंगल10:1911:17दिन
सूर्य11:1712:15दिन
शुक्र12:1513:13दिन
बुध13:1314:11दिन
चंद्र14:1115:09दिन
शनि15:0916:07दिन
गुरु16:0717:05दिन
मंगल17:0518:03दिन
सूर्य18:0319:05रात
शुक्र19:0520:06रात
बुध20:0621:08रात
चंद्र21:0822:10रात
शनि22:1023:12रात
गुरु23:1200:14रात
मंगल00:1401:16रात
सूर्य01:1602:18रात
शुक्र02:1803:20रात
बुध03:2004:21रात
चंद्र04:2105:23रात
शनि05:2306:25रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
8 सित॰ 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
12 सित॰ 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
15 सित॰ 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
16 सित॰ 2028कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश
17 सित॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
18 सित॰ 2028आश्विन अमावस्याअमावस्या
22 सित॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
29 सित॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
1 अक्टू॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
3 अक्टू॰ 2028आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां पर्थ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2577° (लाहिड़ी)। समय पर्थ (Australia/Perth) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।