23 अक्टूबर 2028 को पर्थ का पंचांग

सोमवार, 23 अक्टूबर 2028, पर्थ, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Perth में है।

सोमवार, 23 अक्टूबर 2028 को पर्थ में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल षष्ठी (23:23 तक), नक्षत्र मूल (13:46 तक) और योग अतिगंड है। सूर्योदय 05:27 पर और सूर्यास्त 18:34 पर है। राहुकाल 07:06 से 08:44 तक है।

दिन और रात
दिन 05:27 – 18:34
रात 05:26 तक
तिथि
षष्ठी, 23:23 तक
सप्तमी
नक्षत्र
मूल, 13:46 तक
पूर्वाषाढ़ा
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

23 अक्टूबर 2028 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
शुक्ल षष्ठी 23:23 तक
शुक्ल सप्तमी 00:11, 25 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
मूल 13:46 तक
पूर्वाषाढ़ा 14:52, 24 अक्टू॰ तक
योग
अतिगंडअशुभ 14:46 तक
सुकर्मा 14:02, 24 अक्टू॰ तक
करण
कौलव 11:17 तक
तैतिल 23:23 तक
गर 11:41, 24 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:27
सूर्यास्त
18:34
चंद्रोदय
09:26
चंद्रास्त
इस दिन चंद्रास्त नहीं
दिनमान
13h 7m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:00 – 04:44
अभिजीत मुहूर्त
11:34 – 12:27

अशुभ समय

राहुकाल
07:06 – 08:44
यमगंड
10:22 – 12:01
गुलिक काल
13:39 – 15:17

23 अक्टूबर 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत05:27 – 07:06शुभ
काल07:06 – 08:44टालें
शुभ08:44 – 10:22शुभ
रोग10:22 – 12:01टालें
उद्वेग12:01 – 13:39टालें
चर13:39 – 15:17सामान्य
लाभ15:17 – 16:56शुभ
अमृत16:56 – 18:34शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर18:34 – 19:55सामान्य
रोग19:55 – 21:17टालें
काल21:17 – 22:39टालें
लाभ22:39 – 00:00शुभ
उद्वेग00:00 – 01:22टालें
शुभ01:22 – 02:43शुभ
अमृत02:43 – 04:05शुभ
चर04:05 – 05:26सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र05:2706:33दिन
शनि06:3307:38दिन
गुरु07:3808:44दिन
मंगल08:4409:49दिन
सूर्य09:4910:55दिन
शुक्र10:5512:01दिन
बुध12:0113:06दिन
चंद्र13:0614:12दिन
शनि14:1215:17दिन
गुरु15:1716:23दिन
मंगल16:2317:28दिन
सूर्य17:2818:34दिन
शुक्र18:3419:28रात
बुध19:2820:23रात
चंद्र20:2321:17रात
शनि21:1722:11रात
गुरु22:1123:06रात
मंगल23:0600:00रात
सूर्य00:0000:54रात
शुक्र00:5401:49रात
बुध01:4902:43रात
चंद्र02:4303:38रात
शनि03:3804:32रात
गुरु04:3205:26रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
29 अक्टू॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
31 अक्टू॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
2 नव॰ 2028कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
6 नव॰ 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
10 नव॰ 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
13 नव॰ 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
14 नव॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
16 नव॰ 2028मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
16 नव॰ 2028वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
20 नव॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां पर्थ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2595° (लाहिड़ी)। समय पर्थ (Australia/Perth) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।