22 अक्टूबर 2028 को पर्थ का पंचांग

रविवार, 22 अक्टूबर 2028, पर्थ, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Perth में है।

रविवार, 22 अक्टूबर 2028 को पर्थ में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल पंचमी (23:24 तक), नक्षत्र ज्येष्ठा (13:31 तक) और योग शोभन है। सूर्योदय 05:28 पर और सूर्यास्त 18:33 पर है। राहुकाल 16:55 से 18:33 तक है।

दिन और रात
दिन 05:28 – 18:33
रात 05:27 तक
तिथि
पंचमी, 23:24 तक
षष्ठी
नक्षत्र
ज्येष्ठा, 13:31 तक
मूल
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

22 अक्टूबर 2028 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
शुक्ल पंचमी 23:24 तक
शुक्ल षष्ठी 23:23, 23 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
मूल 13:46, 23 अक्टू॰ तक
योग
शोभन 16:09 तक
अतिगंडअशुभ 14:46, 23 अक्टू॰ तक
करण
बव 11:45 तक
बालव 23:24 तक
कौलव 11:17, 23 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:28
सूर्यास्त
18:33
चंद्रोदय
08:26
चंद्रास्त
23:15
दिनमान
13h 5m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:01 – 04:45
अभिजीत मुहूर्त
11:35 – 12:27

अशुभ समय

राहुकाल
16:55 – 18:33
यमगंड
12:01 – 13:39
गुलिक काल
15:17 – 16:55

22 अक्टूबर 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग05:28 – 07:06टालें
चर07:06 – 08:45सामान्य
लाभ08:45 – 10:23शुभ
अमृत10:23 – 12:01शुभ
काल12:01 – 13:39टालें
शुभ13:39 – 15:17शुभ
रोग15:17 – 16:55टालें
उद्वेग16:55 – 18:33टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ18:33 – 19:55शुभ
अमृत19:55 – 21:17शुभ
चर21:17 – 22:38सामान्य
रोग22:38 – 00:00टालें
काल00:00 – 01:22टालें
लाभ01:22 – 02:44शुभ
उद्वेग02:44 – 04:06टालें
शुभ04:06 – 05:27शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य05:2806:34दिन
शुक्र06:3407:39दिन
बुध07:3908:45दिन
चंद्र08:4509:50दिन
शनि09:5010:55दिन
गुरु10:5512:01दिन
मंगल12:0113:06दिन
सूर्य13:0614:12दिन
शुक्र14:1215:17दिन
बुध15:1716:22दिन
चंद्र16:2217:28दिन
शनि17:2818:33दिन
गुरु18:3319:28रात
मंगल19:2820:22रात
सूर्य20:2221:17रात
शुक्र21:1722:11रात
बुध22:1123:06रात
चंद्र23:0600:00रात
शनि00:0000:55रात
गुरु00:5501:49रात
मंगल01:4902:44रात
सूर्य02:4403:38रात
शुक्र03:3804:33रात
बुध04:3305:27रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
29 अक्टू॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
31 अक्टू॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
2 नव॰ 2028कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
6 नव॰ 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
10 नव॰ 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
13 नव॰ 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
14 नव॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
16 नव॰ 2028मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
16 नव॰ 2028वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
20 नव॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां पर्थ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2595° (लाहिड़ी)। समय पर्थ (Australia/Perth) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।