3 नवंबर 2028 को पर्थ का पंचांग

शुक्रवार, 3 नवंबर 2028, पर्थ, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Perth में है।

शुक्रवार, 3 नवंबर 2028 को पर्थ में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण प्रतिपदा (18:34 तक), नक्षत्र भरणी (13:33 तक) और योग व्यतीपात है। सूर्योदय 05:17 पर और सूर्यास्त 18:43 पर है। राहुकाल 10:19 से 12:00 तक है।

दिन और रात
दिन 05:17 – 18:43
रात 05:16 तक
तिथि
प्रतिपदा, 18:34 तक
द्वितीया
नक्षत्र
भरणी, 13:33 तक
कृत्तिका
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

3 नवंबर 2028 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
कृष्ण प्रतिपदा 18:34 तक
कृष्ण द्वितीया 19:30, 4 नव॰ तक
नक्षत्र
भरणी 13:33 तक
कृत्तिका 15:06, 4 नव॰ तक
योग
व्यतीपातअशुभ 18:47 तक
वरीयान 18:23, 4 नव॰ तक
करण
बालव 05:58 तक
कौलव 18:34 तक
तैतिल 07:05, 4 नव॰ तक
चंद्र राशि
मेष 19:58 तक
सूर्य राशितुला
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:17
सूर्यास्त
18:43
चंद्रोदय
19:47
चंद्रास्त
05:21
दिनमान
13h 26m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:52 – 04:34
अभिजीत मुहूर्त
11:33 – 12:27

अशुभ समय

राहुकाल
10:19 – 12:00
यमगंड
15:21 – 17:02
गुलिक काल
06:57 – 08:38

3 नवंबर 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर05:17 – 06:57सामान्य
लाभ06:57 – 08:38शुभ
अमृत08:38 – 10:19शुभ
काल10:19 – 12:00टालें
शुभ12:00 – 13:41शुभ
रोग13:41 – 15:21टालें
उद्वेग15:21 – 17:02टालें
चर17:02 – 18:43सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग18:43 – 20:02टालें
काल20:02 – 21:21टालें
लाभ21:21 – 22:40शुभ
उद्वेग22:40 – 23:59टालें
शुभ23:59 – 01:19शुभ
अमृत01:19 – 02:38शुभ
चर02:38 – 03:57सामान्य
रोग03:57 – 05:16टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र05:1706:24दिन
बुध06:2407:31दिन
चंद्र07:3108:38दिन
शनि08:3809:45दिन
गुरु09:4510:53दिन
मंगल10:5312:00दिन
सूर्य12:0013:07दिन
शुक्र13:0714:14दिन
बुध14:1415:21दिन
चंद्र15:2116:29दिन
शनि16:2917:36दिन
गुरु17:3618:43दिन
मंगल18:4319:36रात
सूर्य19:3620:29रात
शुक्र20:2921:21रात
बुध21:2122:14रात
चंद्र22:1423:07रात
शनि23:0723:59रात
गुरु23:5900:52रात
मंगल00:5201:45रात
सूर्य01:4502:38रात
शुक्र02:3803:30रात
बुध03:3004:23रात
चंद्र04:2305:16रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
6 नव॰ 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
10 नव॰ 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
13 नव॰ 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
14 नव॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
16 नव॰ 2028मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
16 नव॰ 2028वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
20 नव॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
27 नव॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
30 नव॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
2 दिस॰ 2028मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां पर्थ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2599° (लाहिड़ी)। समय पर्थ (Australia/Perth) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।