18 दिसंबर 2028 को पर्थ का पंचांग

सोमवार, 18 दिसंबर 2028, पर्थ, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Perth में है।

सोमवार, 18 दिसंबर 2028 को पर्थ में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल द्वितीया (08:53 तक), नक्षत्र पूर्वाषाढ़ा (09:27 तक) और योग वृद्धि है। सूर्योदय 05:06 पर और सूर्यास्त 19:20 पर है। राहुकाल 06:52 से 08:39 तक है।

दिन और रात
दिन 05:06 – 19:20
रात 05:06 तक
तिथि
द्वितीया, 08:53 तक
तृतीया
नक्षत्र
पूर्वाषाढ़ा, 09:27 तक
उत्तराषाढ़ा
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

18 दिसंबर 2028 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
शुक्ल द्वितीया 08:53 तक
शुक्ल तृतीया 09:14, 19 दिस॰ तक
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा 10:23, 19 दिस॰ तक
योग
वृद्धि 05:22 तक
ध्रुव 04:21, 19 दिस॰ तक
व्याघातअशुभ 03:51, 20 दिस॰ तक
करण
कौलव 08:53 तक
तैतिल 20:58 तक
गर 09:14, 19 दिस॰ तक
चंद्र राशि
धनु 15:37 तक
सूर्य राशिधनु
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:06
सूर्यास्त
19:20
चंद्रोदय
06:56
चंद्रास्त
21:12
दिनमान
14h 14m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:47 – 04:26
अभिजीत मुहूर्त
11:44 – 12:41

अशुभ समय

राहुकाल
06:52 – 08:39
यमगंड
10:26 – 12:13
गुलिक काल
14:00 – 15:46

18 दिसंबर 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत05:06 – 06:52शुभ
काल06:52 – 08:39टालें
शुभ08:39 – 10:26शुभ
रोग10:26 – 12:13टालें
उद्वेग12:13 – 14:00टालें
चर14:00 – 15:46सामान्य
लाभ15:46 – 17:33शुभ
अमृत17:33 – 19:20शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर19:20 – 20:33सामान्य
रोग20:33 – 21:46टालें
काल21:46 – 23:00टालें
लाभ23:00 – 00:13शुभ
उद्वेग00:13 – 01:26टालें
शुभ01:26 – 02:39शुभ
अमृत02:39 – 03:53शुभ
चर03:53 – 05:06सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र05:0606:17दिन
शनि06:1707:28दिन
गुरु07:2808:39दिन
मंगल08:3909:50दिन
सूर्य09:5011:02दिन
शुक्र11:0212:13दिन
बुध12:1313:24दिन
चंद्र13:2414:35दिन
शनि14:3515:46दिन
गुरु15:4616:58दिन
मंगल16:5818:09दिन
सूर्य18:0919:20दिन
शुक्र19:2020:09रात
बुध20:0920:58रात
चंद्र20:5821:46रात
शनि21:4622:35रात
गुरु22:3523:24रात
मंगल23:2400:13रात
सूर्य00:1301:02रात
शुक्र01:0201:51रात
बुध01:5102:39रात
चंद्र02:3903:28रात
शनि03:2804:17रात
गुरु04:1705:06रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
20 दिस॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
27 दिस॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
29 दिस॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
31 दिस॰ 2028पौष पूर्णिमापूर्णिमा
4 जन॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
8 जन॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
10 जन॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
12 जन॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
14 जन॰ 2029माघ अमावस्याअमावस्या
14 जन॰ 2029मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश

तिथियां पर्थ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2616° (लाहिड़ी)। समय पर्थ (Australia/Perth) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।