22 दिसंबर 2028 को पर्थ का पंचांग

शुक्रवार, 22 दिसंबर 2028, पर्थ, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Perth में है।

शुक्रवार, 22 दिसंबर 2028 को पर्थ में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल षष्ठी (14:01 तक), नक्षत्र शतभिषा (16:43 तक) और योग सिद्धि है। सूर्योदय 05:07 पर और सूर्यास्त 19:22 पर है। राहुकाल 10:28 से 12:15 तक है।

दिन और रात
दिन 05:07 – 19:22
रात 05:08 तक
तिथि
षष्ठी, 14:01 तक
सप्तमी
नक्षत्र
शतभिषा, 16:43 तक
पूर्वा भाद्रपद
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

22 दिसंबर 2028 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
शुक्ल षष्ठी 14:01 तक
शुक्ल सप्तमी 16:28, 23 दिस॰ तक
नक्षत्र
शतभिषा 16:43 तक
पूर्वा भाद्रपद 19:37, 23 दिस॰ तक
योग
सिद्धि 04:54, 23 दिस॰ तक
व्यतीपातअशुभ 05:43, 24 दिस॰ तक
करण
तैतिल 14:01 तक
गर 03:13, 23 दिस॰ तक
वणिज 16:28, 23 दिस॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिधनु
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:07
सूर्यास्त
19:22
चंद्रोदय
10:48
चंद्रास्त
23:17
दिनमान
14h 15m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:49 – 04:28
अभिजीत मुहूर्त
11:46 – 12:43

अशुभ समय

राहुकाल
10:28 – 12:15
यमगंड
15:48 – 17:35
गुलिक काल
06:54 – 08:41

22 दिसंबर 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर05:07 – 06:54सामान्य
लाभ06:54 – 08:41शुभ
अमृत08:41 – 10:28शुभ
काल10:28 – 12:15टालें
शुभ12:15 – 14:02शुभ
रोग14:02 – 15:48टालें
उद्वेग15:48 – 17:35टालें
चर17:35 – 19:22सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग19:22 – 20:35टालें
काल20:35 – 21:49टालें
लाभ21:49 – 23:02शुभ
उद्वेग23:02 – 00:15टालें
शुभ00:15 – 01:28शुभ
अमृत01:28 – 02:41शुभ
चर02:41 – 03:55सामान्य
रोग03:55 – 05:08टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र05:0706:19दिन
बुध06:1907:30दिन
चंद्र07:3008:41दिन
शनि08:4109:52दिन
गुरु09:5211:03दिन
मंगल11:0312:15दिन
सूर्य12:1513:26दिन
शुक्र13:2614:37दिन
बुध14:3715:48दिन
चंद्र15:4817:00दिन
शनि17:0018:11दिन
गुरु18:1119:22दिन
मंगल19:2220:11रात
सूर्य20:1121:00रात
शुक्र21:0021:49रात
बुध21:4922:37रात
चंद्र22:3723:26रात
शनि23:2600:15रात
गुरु00:1501:04रात
मंगल01:0401:53रात
सूर्य01:5302:41रात
शुक्र02:4103:30रात
बुध03:3004:19रात
चंद्र04:1905:08रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
27 दिस॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
29 दिस॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
31 दिस॰ 2028पौष पूर्णिमापूर्णिमा
4 जन॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
8 जन॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
10 जन॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
12 जन॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
14 जन॰ 2029माघ अमावस्याअमावस्या
14 जन॰ 2029मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
18 जन॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां पर्थ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2618° (लाहिड़ी)। समय पर्थ (Australia/Perth) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।